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बुधवार, 15 मई 2013

"श्री मति सोनिया गाँधी जी पर एक नजर ?"

"श्री मति सोनिया गाँधी जी पर एक नजर ?"
जन्म तारीख -9 -12 -1946  समय -21.15 स्थान तुरिन {इटली }तदनुसार कर्क लग्न ,मिथुन राशि है | वर्तमान समय में केतु की महादशा 12 -11 -2012 से शुरू है जो -12 -11 -2019 तक चलेगी ,जबतक यह दशा चलेगी ,संघर्ष ,कलह ,हानि और लाभ देती रहेगी । संतान ,स्वास्थ एवं वाणी के प्रति सजग रहना उचित होगा । आज टिकी हैं तो मंगल की वजह से जो आत्मबल देता है विजय दिलाता है ,पद पर नहीं हैं तो गुरु एवं शुक्र की वजह से जो सत्ता में होते हुए भी दूर रखते हैं । इस समय संतानों को लाभ हो सकता है । अनायास लाभ एवं हानि का दौर अभी इस दशा तक चलता रहेगा । आपकी जीत भी होगी असुर हर भी होगी ।
      प्रेषकः -ज्योतिष सेवा सदन {पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री }मेरठ -भारत
          निःशुल्क ज्योतिष परामर्श एकबार अवश्य मिलेगी रात्रि -8 से 9 में ----दुबारा ज्योतिष परामर्श के लिए शुल्क आजीवन -११०० देने होंगें । {आजीवन अवधी -5 वर्ष है }हेल्प लाइन -9897701636 ---
     

मंगलवार, 14 मई 2013

"रोग की भी जानकारी देती है -जन्म कुंडली "?

            "रोग की भी जानकारी देती है -जन्म कुंडली "?
विधाता की विचित्र लीला में ,यूँ तो सभी जीव उलझते ही रहते हैं ,किन्तु -विवेकवान लोग  -निकलने की कोशिश भी करते हैं -इसके लिये भी रास्ते अलग -अलग होते हैं |-ज्योतिष जहाँ घटित घटना की हमें जानकारी देती है ,वहीँ आयुर्वेद हमारी रक्षा भी करते हैं || मेष और वृश्चिक राशि के जातक =रक्तदोष ,चोट,अग्नि सम्बंधित रोग से युक्त होंगें ||यदि नीम्बू की चाय का सेवन करें ,या पतनी और पत्ती शांत स्वभाव से रहें तो रोग कम हो सकता है || वृष एवं तुला राशि के जातक =काम वासना ,दिल ,चोट ,भय ,तथा शर्करा रोग से युक्त हो सकते हैं |=यदि  खटाई,एवं मन पर अंकुश रखें तो असाध्य कष्ट से दुखी नहीं होंगें ||=मिथुन एवं कन्या राशि के जातक -गला ,कफ चोट ,रक्त चाप ,शर्करा ,दुर्घटना सम्बंधित रोग से ग्रसित होंगें |=यदि -विवेक और निष्ठां से रहें तो  रोग की पीड़ा कुछ कम हो सकती है || =मकर एवं कुम्भ राशि के जातक =वायू ,चोट ,वात,अग्नि सम्बंधित रोग से युक्त होंगें =यदि शनिवार को सात्विक विचार रखें तो रोग से पीड़ा कम हो सकती है ||धनु एम् मीन राशि के जातक-क्षय रोग ,शर्करा ,चोट ,गुप्त रोग से युक्त होंगें ||=गुरूवार , माता पिता एवं गुरु की कृपा के पात्र बनने से असाध्य रोग से मुक्त ओ सकते हैं || कर्क राशि के जातक -कफ ,सफेद दाग ,तथा शर्करा ,चोट अग्नि सम्बंधित रोग से ग्रसित होंगें ||-शिव की उपासना से -सात्विक विचार से रोग कम संभव है || सिह राशि के जातक -ताप ,मस्तिक ,चोट ,दाग ,अग्नि सम्बंधित रोग से ग्रसित होंगें ||=सूर्य या कृपा के पात्र बनने से रोग से मुक्त रहेंगें || भाव -अनंत रोग हैं ,किन्तु रोग के कारण यही होंगें -अतः आप  अपने  जीवन में अनुभव करके देख लें||
     प्रेषकः ज्योतिष सेवा सदन {पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री }-मेरठ उत्तर प्रदेश -भारत ---निःशुल्क ज्योतिष जानकारी एकबार मित्रों को मिलेगी -दुबारा के लिए आजीवन शुल्क देना होगा  -9897701636.09358885616

रविवार, 12 मई 2013

"क्या माया कैलेण्डर में उल्लिखित पृथ्वी की उम्र {5126 }अर्थात 2012 तक ही ?

"क्या माया कैलेण्डर में उल्लिखित पृथ्वी की उम्र {5126 }अर्थात 2012 तक ही ?--प्रश्न का उत्तर जानने से पहले हमें कुछ भारतीय -ज्योतिर गणित {कालगणना }के सन्दर्भ में जानना होगा |

-----सूर्योपनिषद में तो सूर्य को समस्त विश्व की उत्पत्ति तथा लय का कारण कहा है |

        ---"सूर्यात भवन्ति भूतानि सूर्येण पलितानी तू |

               सूर्ये लयं प्राप्नुवन्ति यः सूर्यः सोहम्मेव च ||

---भाव -सूर्य चन्द्र अन्यान्य ग्रह नक्षत्र काल के करता अकर्ता कहे गए हैं |सूर्य सिद्धांत -१/१० के अनुसार काल दो प्रकार का होता है ---एक अव्यय अनंत रूप रहने वाला महाकाल है ,दूसरा सावयव गणना करने योग्य है | मूर्तरूप काल घटी पल ,विपल ,तिथि ,मास ,संवत्सर ,कल्प कल्पान्तर के रूप में गिना जाता है |

---सृष्टि कर्ता ब्रह्माजी हैं | चार युग {कृत ,त्रेता ,द्वापर और कलयुग} का एक महायुग होता है | जिसकी सौर वर्ष संख्या -४३२०००० होती है | इकहत्तर महायुग का एक मन्वंतर होता है | प्रत्येक कल्प में १४मन्वन्तर और १४ इन्द्र बीत जाते हैं |एक कल्प की सौ वर्ष संख्या -4318272000 कही गयी है |

-------कल्पान्त में ब्रह्मा जी का दिन समाप्त होते ही प्रलय जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है | वर्तमान में सृष्टि की रचना हुए -१९५५८८५१०९ वर्ष बीते हैं |इससे स्पष्ट है कि अभी महा प्रलय होने में -२३६२३८६८९१ इतने वर्ष और लगेंगें |

------ऐसा भी नहीं है कि इतनी लम्बी अवधि में प्राकृत में कोई उत्पात न होता हो |अन्तरिक्ष में जब -जब ग्रह अंशसाम्य होते हैं-अथवा ग्रहयुद्ध के संयोग बनते हैं |तब -तब वसुंधरा पर नाना प्रकार के महोत्पत हुआ करते हैं |प्रकृति साम्यावस्था है |जब -जब इसके संतुलन को प्राणी बिगाड़ते हैं ,तब -तब प्रकृति प्रकुपित होकर बड़ी मात्रा में संहार करती है अथवा किसी को माध्यम बनाकर उसके द्वारा विनाशलीला कराया करती है | धर्म की हनी होती है |क्षमाशीलता घटती जाती है |रजोगुण और तमोगुण अपनी चरम सीमा पर होते हैं | तब भयंकर  युद्ध  हुआ करते हैं अधर्मी  दुराचारियों का विनाश  होता है |    

-------यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत |

          अभ्युथान धर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम ||

----नोट -कुदरत के खिलाफ जब -जब क्रूर कारनामे होते हैं ,तब -तब विश्व में उत्पात तो होते ही हैं |भविष्य  के गर्त में यथार्थ क्या है ,इसे तो केवल ईस्वर ही जनता है-परन्तु इतना अवश्य है कि विश्व विनाश की ओर नपे तुले क़दमों से बढ़ता चला जा रहा है |

--भवदीय पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री" {मेरठ उत्तर प्रदेश }

  निःशुल्क ज्योतिष सेवा सभी मित्रों को एकबार ही मिल पायेगी  सम्पर्कसूत्र {हेल्प लाइन } के द्वरा रात्रि - 8  से 9 .३० पर | {आजीवन जानकारी के लिए सदस्य बनना होगा ?} --09897701636 --09358885616

शुक्रवार, 10 मई 2013

कांग्रेस महसचिव -श्री राहुल गाँधी जी प्रधानमत्री कैसे बनेंगें ?

कांग्रेस महसचिव -श्री राहुल गाँधी जी प्रधानमत्री कैसे बनेंगें ?
यूँ तो राहुल गाँधी जी का जन्म -19-जून -1970 प्रातः ५/५पर दिल्ली में ज्येष्ठा नक्षत्र में हुआ ।अभी चंद्रमा की महादशा चल रही है ।नीच का चंद्रमा सप्तम भाव में विराजमान है ।स्वभाव से जुझारू ,जिद्दी प्रकृति के इंसान होंगें । जो थान लेंगें वो पूरा जरुर करेंगें । समझोता नहीं करेंगें ।दाम्पत्य सुख के योग भी चल रहे हैं जो २०१७ तक चलेंगें और बंधन में बंध भी जायेंगें ।।

------इस वर्ष आकाशीय कौसिल के चुनाव में -गुरु को मंत्री पद मिला हुआ है -ये हर संभव सहायता करेंगें ।यह भी संभव है कि वर्तमान प्रधानमंत्री जी स्वयं श्री राहुल गाँधी जी को पद समर्पित करने का प्रस्ताव पेश करें ,या परिस्थिति इन्हें प्रधान मंत्री बना दे ।।
-------कुंडली में नीच का चंद्रमा और चंद्रमा की महादशा--इनकी मनोत्साह की निर्बलता श्री राहुल गाँधी जी के आड़े भी आ सकती है ।।
-----श्री राहुल गाँधी जी का भाग्येस बारहवे बैठता है -और जिनका भाग्येस बारहवें होता है उनका भाग्योदय अपने घर से वाहर होता है ।। अतः विवाह एवं सफलता अपने घर से बाहर विशेष सफल रहेगा ।
------श्री राहुल गाँधी जी की कुंडली में --चारो केन्द्रेस ग्रह केंद्र से बाहर बैठे हैं -इसका अभिप्राय यह भी हो सकता है -कि केंद्र से अलग प्रदेश में भाग्योदय हो ? अत यह पहलीबार कामयाब हो जाएँ ।।

भवदीय -ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{मेरठ }
संपर्कसूत्र - ,09897701636 ,09358885616

शुक्रवार, 3 मई 2013

"शेयर मार्केट की स्थिति मई माह =2013-विशेष ?"

"शेयर मार्केट की स्थिति मई माह =2013-विशेष ?"
 ----माह की शुरुआत में बुध के प्रभाव से खरीदारी का एक विशेष योग है -जिस कारण से सभी कम्पनियों के शेयर बढेंगें एवं तीन दिनों तक रिलायंस ,बिरला ,संलाईफ,टाटा ,सिफी ,{सत्यम कंप्यूटर }-एफटैक ,बीओबी ,सीप्ला ड़ी एल एफ ,गेल ,ग्रासिम ,इण्डियन ऑयल के भावों में तेजी आयेगी । पी .एन .बी ,एस .बी .आई ,टेफ्को के शेयर्स तेज होंगें । दूसरे सप्ताह में सूर्यदेव की वृष की संक्रांति के कारण -14 तारीख मंगलवार से सभी शेयर्स प्रभावित होंगें अर्थात मंदा बरकरार रहेगा । इसलिए -मिडकैप क्षेत्र के शेयर्स में भी बिकवाली की आशंका रहेगी । इसमें एकबार लाभ हो सकता है । अन्यथा एकबार ऊँचे मूल्यों पर फसे रहना पड़ेगा । माह के तीसरे सप्ताह में सूर्य एवं मंगल के प्रभाव से कोल इण्डिया ,एक्साइड ,जी टी एल,हेक्सावेयर ,इन्फोसिस ,सनफर्मा,आटो मोवाइल ,धातुओं से सम्बंधित कम्पनियों के शेयर्स अमेरिकी तथा एशियाई शेयर बाजार के सूचकांक आधारित कम्पनिया जैसे -सत्यम कंप्यूटर ,विप्रो ,सैमसंग ,वीडियोकोन ,के शेयर्स मंदे होकर तेज होंगें । --तथा  बैंकिंग में आई .सी .सी आई,एच .डी .एफ .सी ,एस .बी .आई ,युनियन बैंक के शेयर्स में लाभ हो सकता है । महीने के अंत में गुरु का मिथुन राशि में आगमन से इन शेयरिं में लाभ का योग बनेगा ----आई .पी .सी .एल ,आई ,बी .पी ,इन्फोसीस्नेट ,एच .सी .एल ,माईक्रोसाफ्ट,स्मालकैप ,मिडकैप ,निफ्टी ,सैमसंग ,एल .जी ,टिस्को .कोल द्रिंग्स ,तथा आई .टी सी ,जी .टी .सी ,के शेयर्स लाभ में होंगें ।
------नोट मई माह में निवेस योग्य शेयर्स --कोल इण्डिया ,एक्साइड ,जी .टी .एल ,हेक्सावेयर ,इन्फोसिस ,सन फार्मा ,एच .सी .एल ,आई .बी ,पी ,एवं युनियन बैंक ।
       -----प्रेषकः ज्योतिष सेवा सदन {मेरठ -भारत }
   हेल्प लाइन ---9897701636---आजीवन सदस्यता शुल्क -1100 प्रत्येक व्यक्ति के लिए ---फ्री ज्योतिष जानकारी एकबार अवश्य मिलेगी सभी मित्रों को शाम -8 से 9 में --प्रत्येक दिन । ।
  

सोमवार, 22 अप्रैल 2013

"ज्योतिष सेवा सदन का प्रादुर्भाव ?एक नजर }"

"ज्योतिष सेवा सदन का प्रादुर्भाव ?एक नजर }" --ज्योतिष सेवा सदन --एक व्यक्तिगत सेवा सदन है । जिसका निर्माण -२०१० में हुआ । इस सदन का ध्येय  केवल देश -विदेशों रह रहे मित्रों के लिए है । कोई भी मित्र बनकर निःशुल्क ज्योतिष सेवा सदन के सदस्य बन बन सकते हैं । ज्योतिष सेवा सदन -धन की लालसा से नहीं  अपितु प्रेम की जिज्ञासा से यह सेवा प्रदान करता है । शुल्क इसलिए रखा गया है -ताकि जरुरत लोग ही मित्र बनकर सेवा प्राप्त करें । जहाँ माँ सरस्वती होंगीं वहां माँ लक्ष्मी को आना ही पड़ता है । अर्थात --जब ज्योतिष सेवा सदन आप मित्रों के हित में कार्य करेगा ,तथा उस हित से आपको लाभ होगा तो आप भी ज्योतिष सेवा सदन के लिए सोचेंगें । प्राचीन युगों से ही ब्राह्मण को-दक्षिणा यग्य के उपरांत ही दी जाती है जैसे -किसी भी पूजा में -सर्वप्रथम सामग्री आती है ,पूजा के उपरांत हवन होता है--किन्तु भूदेव को दक्षिणा यग्य सम्बंधित समस्त कार्य होने के उपरांत ही मिलती है ।अतः हम भी उसी परम्परा के अनुसार कार्य करना चाहते हैं ।---विद्या ददाति विनयम विनया द्याति पात्रताम ।

                                                                    पात्रत्वा धन माप्नोति,धनात धर्मः ततः सुखम ।।

भाव -विद्या से विनय आनी चाहिए,और जब विनम्रता आती है --तो लोग सराहना करते हैं,जब सराहना होती है -तो सम्मान भी मिलता है अर्थात समयानुसार मदद भी मिलती है ,और जब मदद या सम्मान मिलता है -तो लोग धर्म अर्थात हित के कार्य भी करते हैं ।।

------आशा ही नहीं उम्मीद है --ज्योतिष सेवा सदन के निर्माता -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {किशनपुरी धर्मशाला देहल गेट मेरठ । के इन बातों पर भरोसा करेंगें ।।

हमारे विचार से ---कुछ माँ के गर्भ से रिश्ते- नाते बनाकर आते हैं,कुछ इस भूमंडल पर बनाते हैं ,अतः जो भी मित्र - ज्योतिष सेवा सदन से जुड़ते हैं -वो सभी मित्र पराये होकर भी अपने होते हैं ,जुड़े हुए सभी मित्रों को हम वही सम्मान देते हैं --जैसे अपनों को देते हैं ।

-----भ्रमित न हों ---ज्योतिष सेवा सदन -आपके भाग्य को नहीं बदल देगा ,बल्कि आपकी कुंडली में प्राप्त भोग्य को ही दर्शायेगा । आपने जो किया है--आप जो पूर्व संचित कर रखा है -उस बात की ही जानकारी देगा ज्योतिष सेवा सदन ---कर्मण्ये बधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ----किन्तु -ये भी सत्य है -ज्योतिष दूरगामी चीज है जो प्रलोभन देती है ,राह बताती है ,एक सकून देती है--और सकून किसको नहीं चाहिए --हम चाहकर भी ज्योतिष को विस्मृत नहीं कर सकते हैं । अतः ज्योतिष का लाभ लेना भी चाहिए -और बताये हुए मार्ग पर चलना भी चाहिए ।

------ज्योतिष सेवा सदन --से जुड़ें ,अपने भविष्य में घटित घटना से कैसे बचें ,एवं हमारी आपकी दुबारा बातचीत हो या न हो -किन्तु वार्षिक राशिफल ,व्यापर का आकलन ,ज्योतिष एवं कर्मकांड के लेखों के माध्यम से नित्य हम आपतक पहुचते रहेंगें । हमें आप अपना परिवार का सदस्य समझें ।

----ध्यान दें ----ज्योतिष सेवा निःशुल्क है आजीवन निःशुल्क रहेगी ।

      {१}-जब भी आपको लगे कि हमें ज्योतिष सम्बंधित सलाह लेनी चाहिए --आप उक्त नंबरों पर प्राप्त करें --9897701636 ,09358885616 --।।

      {२}-आप अपनी स्वच्छा से आजीवन सदस्य बनें ,इसके लिए आपको परेशान नहीं करेगा -ज्योतिष सेवा सदन ।।

    {३}-अगर आपको लगता है --ज्योतिष सेवा सदन आपके हित में कार्य कर रहा है ,तो आप इसकी सराहना करें ,इससे जुड़ें --अन्यथा एकबार तो सेवा अवश्य निःशुल्क प्राप्त करें ।।

-----हमें जितना चाहिए वो परमात्मा की आप मित्रों की कृपा से प्राप्त है । २३ धंटे-हम स्वार्थ के लिए जीते हैं -कितु एक धंटा आप मित्रों के लिए जीना चाहते हैं यही सोच है हमारी ।।

   भवदीय ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "          
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शुक्रवार, 19 अप्रैल 2013

कुंडली मिलान का प्रथम "वर्ण "विचार ?-

---जातकों की कुंडली मिलान में सर्व प्रथम "वर्ण का मिलान देखा जाता है --अर्थात जातीय कर्म ,गुण धर्म ,स्वभाव एवं उत्तम प्रीति रहती है ---सही वर्णों के मिलान होने पर ----अन्यथा मध्यम स्नेह और प्रेम का जीवन में आभाव सा रहता है ।
-------कर्कमीनालयोविप्राः सिंहो मेषो धनुर्न्रेपाः ।
           कन्या वृष मृगा वैश्यः शूद्रा युग्म तुला घटाः ।।
  ------भाव =कर्क ,मीन,वृश्चिक ये तीन राशियाँ -ब्राह्मण वर्ण की हैं ।--मेष ,सिंह ,धनु क्षत्रिय वर्ण की ,कन्या ,वृष ,मकर वैश्य वर्ण की और मिथुन ,तुला ,कुम्भ ये तीनो राशियाँ शूद्र वर्ण की शात्रों में कही गई हैं ।
    ----अर्थात ----यदि वर -कन्या समान वर्ण वाली राशियों में जन्मे हों तो उत्तम रहते हैं ---या कन्या से वर का वर्ण उत्तम हो तो अति उत्तम मानते हैं --परन्तु कन्या से वर का हीन वर्ण हो तो --दाम्पत्य जीवन में नीरसता रहती है ।
                 "हीन वर्णों यदा राशि राशीशो वर्ण उत्तमः ।
                  तदा राशीश्वरो ग्राह्यस्तद राशि चैव चिन्तयेत ।।
अतः वर -कन्या में वर्ण दोष होते हुए भी मान्य नहीं है ,क्योंकि रशिशों के स्वामियों की प्रतिकूलता है तो ----।।    नोट --दाम्पत्य जीवन सुन्दर हो इसलिए कुंडली का सही मिलान बहुत ही जरुरी है ---जबकि जोड़ा तो विधाता ने पहले ही बना दिया ?
----प्रेषकः पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री "{मेरठ -भारत }

"ग्रहमैत्री"अर्थात वैवाहिक अनुभूति "?---

"ग्रहमैत्री"अर्थात वैवाहिक अनुभूति "?-----कुंडली मिलान का वास्तविक विचार वैवाहिक जीवन सुखद हो ,सरस और प्रेम से ओत प्रोत हो ----किन्तु ये सही मैत्री मिलान से ही संभव होता है ।मिलन सभी जीवों के होते हैं परन्तु जीने का ढंग सबके अलग -अलग होता है ।मानव जीवन सर्वोत्तम मानते हैं सभी इसलिए देवता भी लालायित रहते हैं ।हम कैसे जियें ये न सोचकर हमसे लोग ,समाज ,परिवार ,संताने क्या सीखें ये सोच रखने वाले कुंडली का मिलान कराते हैं ---।
      ----------मैत्री कूट सात प्रकार के होते हैं ।-----और इनके गुण 5 मानते हैं ।
                      {1}-वर -कन्या की राशियों में स्वामी ग्रह एक होने पर तथा परस्पर मैत्री सम्बन्ध होने पर -5 गुण होते हैं ।
            {2}-सम मित्रता होने पर -4 गुण मानते हैं ।
            {3}-दोनों में समता होने पर -3गुण मानते हैं ।
                {4}-मित्र से शत्रुता होने पर -1 गुण होता है ।
             {5}-अगर सम शत्रुता हो तो आधा गुण एवं राशियों में परस्पर शत्रुता होने पर गुण नहीं होता है ।
----भाव --मित्रादि होने पर भी यदि नीच या निर्बल हो तो एक गुण कम ही मानते हैं --किन्तु ये सभी जगह मान्य नहीं है ।
   नोट -----कभी -कभी लोग कुंडली मिलान को उपहास समझकर मिलान नहीं कराते हैं किन्तु जब जीवन दुखी हो जाता है तो पुनः ज्योतिष की शरण में आते हैं ------संसार में ज्योतिष भेद -भाव रहित अनमोल गुरुजनों की देन हैं --जो केवल भाव ,श्रद्धा से ही समझ में आ सकती है --अतः  वैवाहिक जीवन सुखी हो-ज्योतिष की भी सुनें ?
-----निवेदक -पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री "-{मेरठ -भारत }

मंगलवार, 16 अप्रैल 2013

"ग्रहण के समय "सूतक" का विचार जानते हैं ?"

"ग्रहण के समय "सूतक" का विचार जानते हैं ?"
--सूर्य ग्रहण में -12 घंटे पहले सूतक लगता है तथा "चन्द्र ग्रहण "में 09 घंटे पहले सूतक लगता है । ग्रहण के समय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल में भोजन ,शयन इत्यादि कर्म वर्जित हो जाते हैं ।इसका भाव -यह है कि ग्रहण के समय सौर मंडल में बहुत प्रदूषण होता है । इससे जड़ -चेतन सब प्रभावित होते हैं । समस्त प्राणी {जीव }भयभीत रहते हैं । प्राकृतिक दृश्य भी बदले -बदले से रहते हैं । बहुत से ज्योति-कणों प्रति सेकेण्ड सैकड़ों मील की गति से चलते हैं । ग्रहण के कारण रुक जाते हैं तथा कणों की छाया की तरह प्रतीत होने लगते हैं । भूमि पर इन कणों की छाया सी बन जाती है एवं थोड़ी ही देर में दिखने लगती है । ग्रहण के समय उन कणों का जीव के मस्तिष्क के कोमल तंतुओं पर जो प्रभाव पड़ता है --उससे प्राणी के आचार -विचार तथा स्वभाव में परिवर्तन आ जाता है । इस भय से भोजन -शयन पर प्रतिबन्ध होता है तथा ग्रहण के पहले एवं बाद में नहाने की व्यवस्था है । इस बात से लगता है हमारे ऋषियों ने कोई भी नियम कपोल -कल्पित नहीं बनाये हैं ।     
   --प्रेषकः ज्योतिष सेवा सदन {मेरठ -भारत } निःशुल्क ज्योतिष जानकारी एकबार कोइ भी मित्र रात्रि -7 .3 0 से 9 .3 0 तक  एकबार प्राप्त कर सकते हैं । दुबारा ज्योतिष जानकारी के लिये सदस्य बनना होता है जिसकी प्रति व्यक्ति आजीवन शुल्क -1100 सौ रूपये हैं । खाता संख्या -20005973259---स्टेट बैंक ब्रह्मपुरी मेरठ ,नाम -कन्हैयालाल शास्त्री -आई एफ एस सी कोड --एस बी आई एन 0002321----सहायता हेतु सूत्र ---91989 7701636----

सोमवार, 15 अप्रैल 2013

हमारे "नक्षत्र" और हमारे "पेड़ "?

हमारे "नक्षत्र" और हमारे "पेड़ "?

--ग्रहों की शांति हेतु पूजा -पाठ ,यग्य हवं में विशेष प्रजाति के पल्लव {टहनी } पुष्प ,फूल ,फल ,काष्ट{समिधा }की आवश्यकता पड़ती है ,जो कि नवग्रह एवं नक्षत्रों से सम्बंधित पौधे ही दे सकते हैं ।पुराणों के अनुसार जिस नक्षत्र में गृह विद्यमान हो उस समय उस नक्षत्र सम्बन्धी पौधे का यत्नपूर्वक संरक्षण तथा पूजन से ग्रह की शांति होती है तथा जातक को मनोवांछित फल मिलता है ।।.



क्यों न हमलोग --अपनी सुख समृधि के लिए - अपने -अपने नक्षत्रों के अनुसार पेड़ ,बगीचा ,बाटिका लगायें?

नक्षत्र ---------------------पेड़ {१५}-स्वाती ------अर्जुन.

{१}-अश्विनी ------कुचिला {१६}-विशाखा ---कटाई.

{2}-भरणी---------आंवला {१७}-अनुराधा ---मौलश्री.

{३}-कृतिका ----गूलर {१८}-ज्येष्ठा-----चीड़.

{४}-रोहिणी ---जामुन [१९}-मूल ----साल.

{५}-मृगशिरा ---खैर {२०}-पूर्वाषाढा---जलवेतस.

[६}-आर्द्रा--------शीशम {२१}-उत्तराषाढा ----कटहल.

{७}-पुनर्वसु ------बांस {२२}-अभिजित{ xxx}.

{८}-पुष्य --------पीपल {23}-श्रवण ---मदार.

{९}-आश्लेषा ---नागकेसर {२४}-शतभिषा ---कदम्ब.

{१०}-मघा-----बरगद {२५}-पूर्वा भाद्रपद ----आम.

{११}-पुर्वा फाल्गुनी-----ढ़ाक {२६}-उत्तरा भाद्रपद ----नीम.

{१२}-उत्तरी फाल्गुनी ----पाकड़ {२७}--रेवती -----महुआ.

{१३}-हस्त ----रीठा

{14}-चित्रा------वेळ

---नोट --उक्त नक्षत्रों के पौधे हैं जो आप --ग्रह जनित दोषों के निवारणार्थ सरलता से पौधे {रोप }लगा सकते हैं । ग्रह ,नक्षत्रों के पौधों का उल्लेख ,पौराणिक ज्योतिष ,आयुर्वेदिक ,तांत्रिक व् एनी ग्रंथों में मिलता है --इनमें से प्रमुख ग्रन्थ हैं --{१}-नारद पुराण{२}-ज्योतिष ग्रन्थ हैं --नारद संहिता {३}-आयुवेदिक ग्रन्थ --राज निघंट वृहत धू श्रुत नारायणी संहिता {४}-तांत्रिक ग्रन्थ -शारदा तिलक ,मन्त्रमहार्णव ,श्री विद्यार्नव तंत्र आदि {५} अन्य ग्रंथ---आनादाश्रम प्रकाशन ,वनस्पति ---अध्यात्म ,नक्षत्र वृक्ष आदि ।।.

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"आपके नक्षत्र "वाटिकाओं से भी प्रसन्न होते हैं ?"

       "आपके नक्षत्र "वाटिकाओं से भी प्रसन्न होते हैं ?"

मित्रप्रवर -राम राम ,नमस्कार |

         हमारे ऋषि -मुनियों ने प्रत्येक ग्रह एवं नक्षत्र से सम्बंधित पौधों के बारे में जानकारी की थी ,तथा नवग्रह एवं नक्षत्र वाटिकाएं की जानकारी कुछ ग्रंथों के द्वरा उपलभध भी करायी थी

      {१}-नारद पुराण{पौराणिक ग्रन्थ }{२}-नारद संहिता {ज्योतिष ग्रन्थ }{३}-राज निघंटु व्रेहतधुश्रुत{आयुर्वेदिक ग्रन्थ }{४}-शारदादितिलक {तांत्रिक ग्रन्थ -मन्त्र महार्णव ,श्रीविद्यार्नव,तंत्र आदि  {६}अन्य ग्रन्थ-आन्दास्रम,प्रकाशन ,वनस्पति ,अध्यात्म नक्षत्र -वृक्ष  इत्यादि ||

            इन तमाम ग्रंथों के मध्यम से जाना जा सकता है -नक्षत्र वाटिकाओं से कितना लाभ हो सकता है | सदैव से यह भी मान्यता रही है -कि ग्रह नक्षत्रों के कुप्रभावों से वृक्ष एवं वनस्पतियाँ समाप्त या कम जरुर कर सकती हैं | भारतीय मान्यता में -सूर्य मंडल  के समस्त सदस्यों व उपसद्स्यों {जिसमें सूर्य एवं चंद्रमा भी शामिल हैं }को ग्रह कहा गया है |ये{ग्रह } धरती के करीब होने से इनकी स्थिति नित्य बदलती रहती है | नक्षत्र -धरती से अत्यधिक दूर होने के कारण परिवर्तन का अनुभव नहीं हो पाता है , अतः नक्षत्र को स्थिर कहे गए हैं | ज्योतिष विद ने -चंद्रमा के रास्ते को २७ भागों में बाटें हैं| प्रत्येक -२७ वें  भाग में पड़ने वाले तारामंडल के बीच कुछ विशेष तारों को पहचान कर उन्हें एक नया नाम दिया -जिन्हें हमलोग नक्षत्रों के नाम से जानते हैं |-इस प्रकार से -नवग्रहों एवं २७ नक्षत्रों की ज्योतिष में पहचान की गयी है ||

    अस्तु -जिस प्रकार से शारीरिक कष्ट को दूर करने कुछ विशेष प्राप्ति के लिए हमलोग जिस प्रकार से रत्न धारण करते हैं |उसी प्रकार से -ग्रहों एवं नक्षत्रों से सम्बंधित पौधों को उगाने से भी लोगों को मनोवांछित फल मिल सकता है | -महर्षि चरक के अनुसार धर्म ,अर्थ ,कम ,मोक्ष  को प्राप्त करने हेतु -आरोग्य रहना आवश्यक है |स्वस्थ शरीर एवं दीर्घ जीवन प्राप्त करने के लिए  भोजन ,शुद्ध  ,वायु ,जल ,तथा प्रदूषण रहित पर्यावरण आवश्यक है |  बाबा तुलसी दास जी के अनुसार -

                      "गगन समीर अनल जल धरनी |

                        इनकी नाथ सहज जड़ करनी ||

हमारे जीवन की भव्यता में -वनस्पतियों की अहम् भूमिका सदैव रही है |लगभग सभी कालों में -वन वाग ,उपवन ,वाटिका ,सर कूप ,वासी सोहई  की प्रथा रही है |आज भी हरियाली तथा शुद्ध पर्यावरण के प्रति हम जागरूक हैं ||

       {१}-सूर्य की प्रसन्नता के लिए -मदार का वृक्ष लगायें |{२}-सोम {चंद्रमा }के लिए पलाश का वृषा लगायें {३}मंगल -के लिए खैर का वृक्ष {४}बुध के लिए  -अपामार्ग {लटजीरा }का वृक्ष लगायें {५}गुरु के लिए -पीपल का वरिश लगायें {६} शुक्र के लिए गूलर का वृक्ष {७}शनि के लिए -शमी का वृक्ष {८}राहू के लिए-दूब लगायें {९}केतु के लिए -कुशा लगायें ||

        कम हम २७ नक्षत्रों से सम्बंधित पौधों से लाभ का जिक्र करेंगें ||


भवदीय निवेदक -ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "{मेरठ -}   संपर्कसूत्र-०९८९७७०१६३६,09358885616

"पति -पतनी में सामंजस्ता अर्थात "गण मिलान"?----

"पति -पतनी में सामंजस्ता अर्थात "गण मिलान"?--------वैवाहिक जीवन में लोग सूझ -बूझ की परम आवश्यकता होती है --किसी की पतनी अच्छी होती है तो किसी के पति अच्छे होते हैं -किन्तु दोनें अच्छे हों तो सामंजस्ता निरंतर बनी रहती है ।कुछ लोग वैवाहिक जीवन अपने लिए नहीं औरों के लिए जीते हैं --ये स्थिति उत्पन्न न हो इसलिए गण का विचार करते हैं कुंडली मिलान में -----।
    ---------रक्षो गणः पुमान स्याचेत्कान्या भवन्ति मानवी ।
                 केपिछान्ति तदोद्वाहम व्यस्तम कोपोह नेछति ।।
--अर्थात -मुहूर्त कल्पद्रुम ग्रन्थ में कहा है -कि कृतिका ,रोहिणी ,स्वाति ,मघा ,उत्तराफाल्गुनी ,पूर्वाषाढ़ा ,उत्तरा षाढा ,इन नक्षत्रों में जन्म होने पर गण दोष मान्य नहीं होता है ।
                 -------कृतिका रोहिणी स्वामी मघा चोत्त्राफल्गुनी ।
                            पूर्वा षाढेत्तराषाढे न क्वचिद गुण दोषः ।।
भाव -----वर- कन्या के राशि स्वामियों में मैत्री हो अथवा नवांश के स्वामियों में मैत्री हो तो गण आदि दुष्ट रहने पर भी विवाह पुत्र -पौत्र को बढ़ाने वाला सुखद प्रिय होता है ।
     ------नोट -अश्विनी आदि सभी नक्षत्रों के गुण ,कर्म ,स्वभाव ,परिक्षण परित्वेना --1-देवगण -2-नर गण -3-राक्षस गण -तीन विभागों में बांटा गया है ।
    {1}-वर -कन्या दोनों एक गण के हों तो उत्तम सामंजस्ता  रहती है ।
    {2}-देव -नर हों तो मध्यम सामंजस्ता रहती है ।
    {3}-देव -राक्षस हो तो -लडाई -झगडे के कारण सामंजस्ता नहीं रहती है ।
-नोट -शारंगीय में कहा गया है -कि वर -राक्षस गण का और कन्या मनुष्य गण की हो तो विवाह उचित और सामंजस्ता रहती है ।इसके विपरीत वर मनुष्य गण का एवं कन्या राक्षस गण की हो तो विवाह उचित नहीं रहता अर्थात सामंजस्ता नहीं रहती है ।।
------निवेदक पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री "{मेरठ -भारत }

     ज्योतिष परामर्श हेतु-09897701636-09358885616------!

"नाड़ी दोष अर्थात वियोग और संताप "?

"नाड़ी दोष अर्थात वियोग और संताप "?---वैवाहिक जीवन -लोभ ,अर्थ ,काम के बाद मोक्ष प्राप्ति से ही सही माना जाता है ।और इसके लिए पत्ति -पतनी का सहयोग अतिम घडी तक बना रहना चाहिए । ये संभव नाड़ी का मिलान सही होने से ही होता है ।

          ---------कुंडली मिलान का आठवाँ विचार नाड़ी विचार को जानते हैं ।

              {1}-आदि नाडी -अश्विनी ,आर्द्रा ,पुनर्वसु ,उत्तर फाल्गुनी ,हस्त ,ज्येष्ठा ,मूल ,शतभिषा और पूर्व भाद्रपद -ये 9-नक्षत्र को आदि नाडी कहते हैं ।

                {2}-भरणी ,मृगशिरा ,पुष्य ,पूर्व फाल्गुनी ,चित्रा ,अनुराधा ,पूर्वा षाधा ,धनिष्ठा और उत्तर भाद्रपद को मध्य नाडी कहते हैं ।

                 {3}-कृतिका ,रोहिणी ,शलेषा ,मघा ,स्वाति ,विशाखा ,उत्तर षाढा श्रवण और रेवती को अन्त्य नाड़ी कहते हैं ।

प्रभाव ------किसी भी एक नाड़ी में वर -कन्या दोनों के नक्षत्र होने पर दाम्पत्य सुख अत्यंत भयावह हो जाता है ।दोनों में से किसी एक को शारीरिक अत्यंत पीड़ा होती है और वियोग हो जाता है ।

                 "निधनं मध्यम नाड्याम दाम्पत्योर्नैव पार्श्व योनाड्योह "

-----अर्थात -ज्योतिष प्रकाश -में इस वाक्य में मध्य नाडी होने पर दोनों दोनों {पति -पतनी }को बहुत कष्ट झेलने पड़ते हैं ।-तीनों नाड़ियों में दोष होने पर दाम्पत्य जीवन अडिग नहीं रहता है ।

              "नाडी दोशोस्ति विप्राणां वर्ण दोषोस्ती भूभुजाम ।

               वैश्यानां गण दोषः स्यात शुद्राणाम योनिदूश्नाम ।।

भाव -कुछ आचार्यों ने कहा -नाडी दोष केवल ब्राह्मणों को लगता है ।और वर्ण दोष क्षत्रियों को ही लगता है ।एवं गण दोष वैश्यों को ही लगता है तथा -योनी दोष दासों को ही लगता है ।

  नोट -जब जीवन की घडी लम्बी न हो ,सुखद न हो ,मोक्ष प्राप्ति तक न पंहुंचे -अर्थात पति -पतनी साथ -साथ अंतिम पड़ाव तक न पँहुचे तो वैवाहिक सुख अधूरा रहता है इसलिए कुंडली मिलान नितांत आवश्यक है ।जिस प्रकार नरकों के वर्णन सुनकर नरकों में नहीं जाना चाहते हैं इसी प्रकार वैवाहिक जीवन सर्वगुण संपन्न हो कुंडली मिलान अनिवार्य समझें ।

    प्रेषकः -पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री "मेरठ उत्तर प्रदेश -भारत ।

          ज्योतिष सहायता सूत्र -9897701636-9358885616------।।

वैवाहिक जीवन की आयु अर्थात "भकूटदोष"?

  वैवाहिक जीवन की आयु अर्थात "भकूटदोष"? 
-------दाम्पत्य जीवन सरस हो ,प्रेम की अविरल धारा वहती हो अर्थात सभी सुख हो किन्तु अवधि {आयु }लम्बी न हो तो फिर पुत्र ,पौत्र के बिना वैवाहिक जीवन अधूरा रहता है । ये वैवाहिक जीवन दीर्घायु हो इसलिए "भकूट दोष अर्थात राशि मिलान करते  हैं ।
         "मृत्युह षडाष्ट के ज्ञेयो पत्य्हा निर्नवात्माजे ।
          द्विर्द्वादशो दरिद्रत्व्म द्वयोर्न्यत्र सौख्यक्रित ।।
-----अर्थात -वर -कन्या की राशियों का स्वामी ग्रह एक ही हो ,अथवा दोनों राशियों में मैत्री हो तथा नाड़ी नक्षत्र शुद्ध रहे तो दुष्ट "भकूट दोष "में भी विवाह शुभ होता है ।
    --------किन्तु उक्त शलोक में --{1}-वर की राशि से कन्या की राशि तक और कन्या की राशि से वर की राशि तक गिनने पर -6/8-संख्या हो तो दोनों {पति -पतनी }को चोट पहुँचती है ।
         {2}-अगर ये संख्या -9/5-हो तो संतानों को माता -पिता से या संतान से माता -पिता को हानी सहनी पड़ती है ।
{3}-यदि गिनती से शेष संख्या -2/12-हो तो वैवाहिक जीवन में गरीबी अर्थात धन की दुखद स्थिति रहती है ।
 {4}-अशुभ केंद्र योग -4/10-को माना गया है । ये चार प्रकार के सम्बन्ध --षडाष्टक {6/8}-नव -पंचम -{9/5}-द्वि द्वादश -{2/12}--और केंद्र योग ये ज्योतिष के कई ग्रंथों में अशुभ माने गये है ।
   नोट ---ज्योतिष का भाव डराने का  नहीं अपितु आपका वैवाहिक जीवन सुखद हो इसलिए ज्योतिष की सलाह अवश्य लेनी चाहिये ।अगर प्रेम या पसंद हो तो विवाह के समय उन नामों से न करें जो दोष कारक हों ?
    प्रेषकः -"झा शास्त्री "{मेरठ -भारत }

         सहायता सूत्र -9897701636-9358885616-------!!

गुरुवार, 11 अप्रैल 2013

"अंग्रेजी का "सन"भी संवत्सर {संवत }का ही प्रतीक है ?"

 ---ज्योतिषी विद्वानों के अनुसार कार्तिक शुक्ल नवमी को कृतयुग का आरम्भ हुआ है । वैशाख शुक्ल तृतीया को त्रेतायुग की प्रसूति हुई है । माघ कृष्ण अमावस्या को द्वापर का सूत्रपात तथा भाद्र कृष्ण त्रयोदशी को कलियुग की उत्पत्ति हुई है । शब्द मीमांसाशास्त्र के प्रणेता एवं वेत्ताओं ने "संवत्सर "शब्द को भी युग शब्द का ही पर्यायवाची शब्द स्वीकार किया है ।
    -------संवत्सर के विषय में एक प्रमुख बात यह भी है -कि उत्तर भारत में प्रायः चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से विक्रम संवत्सर का प्रारंभ मानते हैं ,किन्तु गुजरात एवं महाराष्ट्र आदि दक्षिण प्रान्तों में कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से विक्रम संवत्सर का प्रारंभ मानते हैं ।
       -----तैत्तरीय ब्राह्मण में लिखा है कि अग्नि =संवत्सर है । एवं -आदित्य {सूर्य }=परिवत्सर हैं । तथा -चंद्रमा =इदावत्सर और वायु =अनुवत्सर है । आधुनिक विख्यात संवत शब्द संवत्सर शब्द का अपभ्रंश है । सम +वस्ति +ऋतवः भाव -अच्छी ऋतु जिसमें है ,उस काल गणना के प्रमाण को संवत्सर कहते हैं । इसलिये जन्म कुंडली की शुरू लेखन में संवत्सर का ही निर्देश होता है । एक संवत्सर एक वर्ष का माना जाता है ।ज्योतिष के आचार्य गुरु स्थित राशि भोग काल को संवत्सर मानते हैं क्योंकि गुरु भी एक राशि में एक वर्ष निवास करते हैं । संवत्सर -कुल  साठ -{६० }हैं । समस्त संवत्सरों का फलाफल -उन्नति +अवनति सूर्य की सशक्त गति और काल वैभव पर आधारित है ।
         ----संसार का कोई भी देश ऐसा नहीं है जिसकी धरती पर इस दिन नायक सूर्य ने अपनी रोशनी न दी हो । एवं उस देश के निवासियों ने लाभ नहीं लिया हो तथा इनकी अर्चना नहीं की हो !लाभ देने वाला यह सार्वभौमिक नक्षत्र-{सूर्य }प्रत्येक स्थान पर श्रदा एवं निष्ठा के साथ पूजा जाता है ।
       ---अर्थात -संसार का ऐसा कोई महापुरुष नहीं है ,जो इसे महत्त्व न देता हो ,इसी के उदय से भारतवर्ष में संवत्सर परिपाटी का प्रचलन शुरू हुआ । अंग्रेजी सन भी संवत्सर का ही प्रतिक है ।
         निवेदक -ज्योतिष सेवा सदन {मेरठ -भारत }
         नव संवत्सर पर हम सभी ज्योतिष प्रेमियों का अभिनन्दन करते हैं ---सभी के लिये नव वर्ष मंगलमय हो !  {वन्दे मातरम }  

बुधवार, 10 अप्रैल 2013

"वर्ष {संवत्सर }कहते किसको हैं ?"


"रितुभिहि संवत्सरः शक्प्नोती स्थातुम "
अर्थात -जिसमें ऋतुएं वास करती हैं वह "वर्ष" या "संवत्सर" कहलाता है ||
वर्ष-को दो भागों में विभाजित किया गया है -
{ १}-सौर वर्ष {२}-चन्द्र वर्ष
{१}-सौर वर्ष - पृथ्वी को सूर्य की परिक्रमा करने के लिए ३६५ दिन १५ घंटे और११ मिनट का जो समय लगता है, उसे "सौरवर्ष" कहते हैं ||
{२}-चन्द्र वर्ष-चंद्रमा को पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिए- ३५४ दिन का जो समय लगता है -उसे चन्द्र कहते हैं ||
प्रेषकः -"झा शास्त्री "
ज्योतिष परामर्श -रात्रि ८ से९ {09897701636 ,9358885616

सोमवार, 8 अप्रैल 2013

"अपने विवेक का सतत उपयोग करें ?"

-{१}-मनः  एवं मनुष्याणाम कारणं बंध मोक्षयोह ?
------भाव -मनुष्यों के बंधन और मोक्ष का कारण  उनका मन ही है ।अतः विवेक रूपी मन का प्रयोग से मोक्ष मिल सकता है । अविवेकी होकर बन्धनों के पाश में जकड़े ही रहते हैं ।।
{२} -नासमीक्ष्य परं स्थानं पुर्वमायतनं त्यजेत ?-
   ----भाव -दूसरा स्थान देखे बिना पहला स्थान नहीं छोड़ना चाहिए ।अर्थात --हमलोग किसी भी प्रलोभन में बहुत जल्दी उलझ जाते हैं --अतः विवेक से पथ का चयन करें ।
{३}-लोचनाभ्यां विहीनस्य दर्पणः किं करिष्यति ?
----भाव -आँखों से रहित व्यक्ति को दर्पण क्या लाभ पहुंचा सकता है ।-अर्थात किसी भी बात को विवेक से समझे बिना प्रत्युत्तर न दें ।।
-----{४}-यांचा मोघा वरमाधिगुने नाधमे लाभ्धकामा ।
-----भाव -सज्जन से निष्फल याचना भी अच्छी,किन्तु नीच से सफल याचना भी अच्छी नहीं --अर्थात -हमें मागना अच्छे लोगों से चाहिए चाहे मिले या न मिले ,किन्तु बुरे लोगों से मांगने से कुछ मिल भी जाये तो प्रसन्न नहीं होना चाहिए ।।
-----प्रियेषु सौभाग्य फला ही चारुता ?
---भाव --सुदरता प्रिय को प्रसन्न करने पर ही सार्थक है । अर्थात --- सुदरता की उपमा केवल साहित्य में प्रियतमा के लिए है ,यद्यपि सुन्दरता सबको प्रिय है ,परन्तु किसी भी सुदरता से प्रियतमा प्रसन्न हो जाये  -तो आपकी सुन्दरता सार्थक है ।।
----आपदि स्फुरति प्रज्ञा यस्य धीरः स एव  ही ?
----भाव --आपत्ति के समय जिसकी बुद्धि स्फुरित होती है ,वही धैर्यवान है----अर्थात आपत्ति के समय जो विवेक से काम लेते हैं,बिचलित नहीं होते हैं ,वही व्यक्ति विवेकवान होते हैं ।।
भवदीय -पंडित कन्हैयालाल झा-  किशनपुरी धर्मशाला देहली गेट मेरठ {उत्तर प्रदेश }
     ज्योतिष सेवा रात्रि ८ से९ सभी मित्रों के लिए उपलब्ध रहती है । सूत्र -0989770163,09358885616 

रविवार, 7 अप्रैल 2013

"परीक्षा में होंगें सफल ,दुष्ट ग्रहों के दुष्ट प्रभाव को यूँ करें निष्फल ?"

"परीक्षा में होंगें सफल ,दुष्ट ग्रहों के दुष्ट प्रभाव को यूँ करें निष्फल ?"

अत्यधिक मेहनत, दिन रातों की कोशिश ,उत्तम शिक्षा फिर भी सफलता अनुकूल क्यों नहीं मिलती -क्योंकि -भाग्यम फलती सर्वत्र ,न विद्या न च पौरुषम --पूर्व जन्म के दोष के कारण अत्यधिक कोशिश के बाद भी हम    अपने जीवन में निरास हो जाते हैं । चाहे उसे ग्रहों के दुष्प्रभाव कहें या भाग्य ?---२०१२ में शिक्षा जगत के लिए बहुत ही उत्तम समय चल रहा है ---शुक्रस्य पञ्चवारास्यु यात्रा मासे निरंतरम । प्रजा वृद्धि सुभिक्षम च सुखं तत्र प्रवर्तते ----अर्थात पृथ्वी पर चारो प्रकार के जीवों को वृद्धि होगी ,सुख समृधि बढ़ेगी ।।-अगर आप परीक्षा देने जा रहे हैं -तो अपनी -अपनी राशि  के अनुसार कुछ यूँ प्रयोग करके देखें  असंभव सा प्रश्न भी संभव हो जायेगा --।
{१}-मेष -चने की दाल एवं गुड गाय को खिलाकर जाएँ - पीला रुमाल ,या पीला कलम का प्रयोग करने से स्मरण शक्ति तेज होगी ।
{२}-वृष-कुत्ते को दूध पिलाकर परीक्षा देने जाएँ-अपनी जेब में रुद्राक्ष रखें या काली कलम का प्रयोग करें -सफलता जरुर मिलेगी ।
{३}-मिथुन -मछली के दर्शन या  मंदिर का अवलोकन करें ,हरी कलम से लिखें -एक सिक्का अपने ऊपर उतारकर पेड़ की जड़ में रखने से सफलता जरुर मिलेगी ।
{४}-कर्क - दूध का दान ,शहद का पान करके परीक्षा देने जाएँ -सफेद कलम या मोती   की माला धारण करने से सफलता जरुर मिलेगी ।      
{5}-सिंह - गाय को गुड खिलाकर -या बंदरों को फल खिलाकर परीक्षा देने जाएँ -चित्रित लेखनी का प्रयोग करें ,मन को स्थिर रखें स्मरण न आने पर दोनों हाथों को क्षण भर के लिए नेत्रों पर रखें याद आ जाएगी एवं सफलता जरुर मिलेगी ।{६}कन्या - गाय को चारा या हरे फल भागवान को अर्पण करके परीक्षा देने जाएँ -गुरुजनों के चरण स्पर्श ,दही पान करके यात्रा करें सफलता जरुर मिलेगी ।
{७}-तुला -दर्पण का करें अवलोकन ,गणपति जी का स्मरण -काली लेखनी का प्रयोग से सफलता जरुर मिलेगी ।{८}वृश्चिक -झाड़ू का दान ,मखानो  के पान,लाल वस्त्र  के उपयोग  से सफलता  जरुर मिलेगी  ।
{9}-धनु   - केला  करें मंदिर में अर्पण एवं  पिली वस्तु -{कलम या रुमाल }करें धारण सफलता जरुर मिलेगी ।{10}-मकर - काली लेखनी ,काला रुमाल शनि देव को  कराएँ स्पर्श एवं रखें अपने पास बदले में दक्षिणा चढ़ाकर जाएँ परीक्षा  देने जाएँ सफलता जरुर मिलेगी ।
{11}-कुम्भ -नारियल शनिदेव  को करें अर्पण ,us दिन काली वस्तुओं  का करें समर्पण -सफलता जरुर मिलेगी ।
{12}-पीला चन्दन लगायें  ,पीली लेखनी एवं पीला रुमाल अपने पास रखें -भागवान विष्णु  को पीली माला अर्पण करके  परीक्षा देने जाएँ सफलता जरुर मिलेगी ।
--भवदीय पंडित के०एल० झा शास्त्री  {मेरठ }ज्योतिष परामर्श  -09897701636,09358885616-रात्रि  ८ से 9 सभी  मित्रों  के लिए ?

शनिवार, 6 अप्रैल 2013

"कैरियर निर्माण हेतु -कुंडली का निरिक्षण अवश्य करें ?

"कैरियर निर्माण हेतु -कुंडली का निरिक्षण अवश्य करें ?"प्राचीन कल में शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान प्राप्ति होता था |विद्यार्थी किसी योग्य विद्वान के निर्देशन में विभिन्न प्रकार की शिक्षा ग्रहण करते थे |इसके  अतिरिक्त उसे शस्त्र सञ्चालन एवं विभिन्न कलाओं का प्रशिक्षण भी दिया जाता था |किन्तु वर्तमान समय में यह सभी प्रशिक्षण गौण हो गए हैं |शिक्षा की महत्ता बढ़ने व् प्रतिस्पर्धात्मक युग में सजग रहते हुए बालक के बोलने व् समझने लगते ही माता -पिता शिक्षा के बारे में चिंतित हो जाते हैं |कुछ वर्षों बाद सबसे बड़ी समस्या यही होती है कि कौन सा विषय पढ़ायें ,जिससे उनके बच्चे का भविष्य सुखमय हो ?
----{१}-सर्वप्रथम जातक के बचपन से ही उसकी कुंडली विषय की पढाई व् कैरियर चयन में सहायक होती है |
---{२}जातक की कुंडली से तय करना चाहिए कि वह नौकरी करेगा या व्यवसाय |
---{३}-जातक कि २० से ४० वर्ष की उम्र के बिच की ग्रहदशा का सूक्षम अध्ययन कर यह देखना चाहिए कि दशा किस प्रकार के कार्यक्षेत्र का संकेत दे रही है |
----{४}-आगामी गोचर या दशा कार्य क्षेत्र में तरक्की का संकेत दे रही है या नहीं ? इसका भी परीक्षण कर लेना चाहिए |
कुंडली में शिक्षा का योग -----जन्म कुंडली का नवम भाव धर्म त्रिकोण स्थान है ,जिसके स्वामी देव गुरु वृहस्पति हैं | यह भाव शिक्षा में महत्वाकांक्षा व् उच्च शिक्षा तथा उच्च शिक्षा किस स्टार कि होगी इसको दर्शाती है | यदि इसका सम्बन्ध पंचम से हो जाये तो अच्छी शिक्षा मिलती है ||
----शिक्षा का स्तर------जन्मकुंडली  का पंचम भाव बुद्धि ,ज्ञान ,कल्पना ,अतीन्द्रिय ज्ञान,रचनात्मक कार्य ,याददास्त व् पूर्वजन्म के संचित कर्म को दर्शाता है | यह शिक्षा के संकाय का स्तर तय करता है ||
-----शिक्षा किस प्रकार की होगी --------जन्मकुंडली का चतुर्थभाव मन का भाव है |यह इस बात का निर्धारण करता है कि आपकी मानसिक योग्यता किस प्रकार की शिक्षा में होगी |जब भी चतुर्थ भाव का स्वामी छठे ,आठवें या बारहवें भाव में गया हो या नीच राशि,अस्त राशि ,शत्रु राशि में बैठा हो व् करक ग्रह {चंद्रमा } पीड़ित हो तो शिक्षा में मन नहीं लगता है ||
-----शिक्षा का उपयोग -----जन्मकुंडली का द्वितीय भाव -वाणी ,धन ,संचय ,व्यक्ति की मानसिक स्थिति को व्यक्त करता है तथा यह दर्शाता है कि शिक्षा आपने ग्रहण कि है वह आपके लिए उपयोगी है या नहीं |यदि इस भाव पर पाप ग्रह का प्रभाव हो तो जातक शिक्षा का उपयोग नहीं करता है |
  जातक को बचपन से किस विषय की पढाई करवानी चाहिए ,इस हेतु हम मूलतः निम्न चार पाठ्यक्रम{ विषय } को ले सकते हैं --गणित ,जिव विज्ञानं ,कला और वाणिज्य -----
   {१}-गणित ---गणित के करक ग्रह बुध का सम्बन्ध यदि जातक के लग्न ,लग्नेश या लग्न नक्षत्र से होता है तो वह गणित में सफल होता है ||
 {२}-शनि एवं मंगल किसी भी प्रकार से सम्बन्ध बनायें तो जातक -मशीनरी कार्य में दशा होता है ||
---जीव विज्ञानं -सूर्य का जल राशिस्थ होना ,छठे एवं दशम भाव /भावेश के बीच सम्बन्ध ,सूर्य एवं मंगल का सम्बन्ध आदि चिकित्सा क्षेत्र में पढाई के करक होते हैं
---कला ------पंचम /पंचमेश एवं करक गुरु ग्रह का पीड़ित होना कला के क्षेत्र में पढाई का करक होता है | इन पर शुभ ग्रहों की दृष्टि पढाई प[उरी करवाने में सक्षम होती है ||
--वाणिज्य --लग्न /लग्नेश का सम्बन्ध बुध के साथ -साथ गुरु से भी हो तो जातक वाणिज्य की पढाई सफलता पूर्वक करता है ||
  आइये जानते हैं अच्छी शिक्षा के योग -----
{१}-द्वितीयेश या वृहस्पति केंद्र या त्रिकोण में हों |
{२}-पंचम भाव में बुध की स्थिति अथवा दृष्टि या बृहस्पति और शुक्र की युति हो |
{३}-पंचमेश की पंचम भाव में वृहस्पति या शुक्र के साथ युति हो ?
{४}-बृहस्पति ,शुक्र और बुध में से कोई भी केंद्र या त्रिकोण में हो ?
---नोट - शिक्षा की सलाह अपने -अपने पुरोहित जी आचार्यजी से लें और अपनी -अपनी संतानों को शिक्षा की सही राह दिखाएं ||
   भवदीय निवेदक -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ -उत्तर प्रदेश }
  निःशुल्क ज्योतिष सेवा एकबार ही सभी मित्रों को संपर्क सूत्र द्वारा ही मिल पायेगी -रात्रि -8  से 9 .३० में =09897701636 ,09358885616   

शुक्रवार, 5 अप्रैल 2013

"अपनी -अपनी जन्म तिथियों के स्वाभाव और प्रभाव जानें ?"

--ज्योतिष के दो प्रारूप हैं -गणित और फलित |-गणित को गणना के माध्यम से  ही जाना जा सकता है ,किन्तु समय के आभाव के कारण कुछ जातक - आपकी कुंडली की जानकारी से वंचित रह जाते हैं | उन जातकों के हित के लिए और जिन जातकों को अपनी कुंडली की जानकारी उपलब्ध रहती है उन सभी के लिए भी--अपनी -अपनी जन्म तिथियों की जानकारी के द्वारा -अपने -अपने  कष्टको दूर कर सकते हैं |
----वैदिक प्रक्रिया में सात्विक  बलिदानों के विधान बताये गए हैं-|
जन्म चाहे शुक्ल पक्ष में हो या कृष्ण पक्ष में तिथिओं का फलित यथावत होता है |
{१}-प्रतिपदा तिथि में जन्म हुआ हो तो -- स्वामी अग्निदेव हैं -कष्ट तिथि आपकी द्वादशी होगी --शक्कर एवं घी की आहुति देने से {हवन में }लाभ होगा |-दान आप -घी एवं अन्न का करें |
{२}-द्वितीया तिथि में जन्म हुआ हो तो --आपके स्वामी -ब्रह्मा हैं,कष्दायक तिथि पंचमी रहेगी ,पायस{खीर }की आहुति देने से लाभ होगा,---भोजन का दान करने से सुख समृद्धि आएगी  |
{३}-तृतीया तिथि में जन्म हुआ हो तो - इष्टदेव -देवी हैं ,सप्तमी तिथि आपके लिए हानिकारक रहेगी ,घी और अन्न की आहुति से लाभ होगा ,-दान आप रक्तवस्त्र का करें -अत्यधिक प्रसन्नता मिलेगी ||
{४}-चतुर्थी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो --इष्टदेव आपके गणेशजी हैं ,पूर्णिमा तिथि आपके लिए अहितकर रहेगी ,मिष्टान की आहुति देने से-प्रसन्नता मिलेगी ,रत्न मूंगा का दान से लक्ष्मी की प्राप्ति होगी ||
{५}-पंचमी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो -इष्टदेव आपके नागदेव हैं ,षष्ठी तिथि आपके लिए अहितकर रहेगी ,खीर की आहुति से लाभ होगा ,दूध का दान से प्रसन्नता मिलेगी ||
{६}-षष्ठी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो -इष्टदेव आपके कार्तिकजी हैं ,द्वादशी तिथि कष्दायक रहेगी आपके लिए ,मोदक की आहुति से लाभ होगा ,चित्रित वस्त्र का दान से उन्नति होगी आपकी ||
{७}-सप्तमी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो -इष्टदेव आपके सूर्यदेव हैं ,अष्टमी तिथि में हानी होगी आपको ,खीर की आहुति से लाभ मिलेगा ,ताम्बे के पत्र का दान से लक्ष्मी की प्राप्ति होगी ||
{८}-अष्टमी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो - इष्टदेव आपके शिव हैं ,त्रयोदशी तिथि हानिकारक रहेगी ,सामग्री { शाकल्य }की आहुति से लाभ होगा ,पीतवस्त्र का दान से पद और गरिमा मिलेगी |
{९}-नवमी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो -इष्टदेव आपकी दुर्गा हैं ,तृतीया तिथि हानिकारक रहेगी ,मिष्ठान्न की आहुति से उन्नति होगी ,रक्तवस्त्र का दान से लाभ होगा |
{१०}-दशमी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो -इष्टदेव आपके यमदेव हैं ,दशमी तिथि आपके लिए अहितकर रहेगी,शाकल्य की आहुति से उन्नति होगी ,नीलवस्त्र  का दान से रोग शोक नहीं होंगें ||
{११}एकादशी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो --आपके इष्टदेव विस्वेदेव हैं , सप्तमी तिथि हानिकारक रहेगी ,मोदक की आहुति से लाभ होगा ,पीतवस्त्र का दान से उन्नति होगी |
{१२} द्वादशी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो -इष्टदेव आपके विष्णुदेव हैं ,सप्तमी तिथि हानिकारक रहेगी ,मिष्ठान की आहुति से लाभ होगा ,स्वेत्वस्त्र का दान से उन्नति होगी |
{१३}त्रयोदशी तिथि में आपका जन्म हुआ हो तो-इष्टदेव आपके कामदेव हैं ,दशमी तिथि हानिकारक रहेगी ,दही और शर्करा की आहुति से लाभ होगा ,स्वर्ण का दान से राजयोग बनेगा |
{१४}-चतुर्दशी  तिथि में जन्म हुआ हो तो -- इष्टदेव आपके शिव हैं ,अमावस तिथि हानिकारक रहेगी ,शाकल्य  की आहुति से लाभ होगा,रजत का दान या अभिषेक से उन्नति होगी ||
{१५}पूणिमा तिथि में जन्म हुआ हो तो -आपके इष्टदेव चन्द्रमा हैं ,दही का दान से लाभ होगा ,चंडी का दान से उन्नति होगी |
{१६}-अमावस तिथि में जन्म हुआ हो तो --इष्टदेव आपके पितर हैं,तृतीया तिथि आपके लिए अहितकर रहेगी ,पका अन्न की आहुति से लाभ मिलेगा {खीर },सुन्दर भूदेव को भोजन करने से लाभ होगा ||
-----सभी मित्र बंधू अपनी -अपनी तिथि में जन्म के अनुसार प्रयोग करके देखें अति लाभ होगा ||
--निवेदक -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ उत्तर प्रदेश }
  निःशुल्क ज्योतिष सेवा रात्रि 8  से .9  ३० तक  प्रत्येक रात्रि सभी मित्रों के लिए उपलब्ध रहती है | हेल्प लाइन के द्वारा यह सेवा प्राप्त करें == 09897701636 ,09358885616 

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मंगलवार, 2 अप्रैल 2013

"ज्योतिषी एक "टाइम स्पेशलिष्ट "होते हैं ?"



 मैं अपने पूर्वानुमानों को वैज्ञानिक रूप से परिभाषित करता हूँ --जबकि फलित ज्योतिष के अन्य विद्वान ज्योतिष के शास्त्रीय नियमों की चर्चा करते हैं ।सामान्यतः -एक ही ग्रह -स्थिति के प्रभावों को बताते हुए हम भिन्न -भिन्न निष्कर्षों पर पहुचते हैं । इसका कारण ज्योतिष के परम्परिक नियमों की अपनी -अपनी व्याख्या है -----जो  सैधांतिक होते हुए भी प्रमाणिक नहीं कही जा सकती है ।
     ------मेरे विचार से ज्योतिषी टाइम {समय  }का विशेषग्य होता है । वह अनुमानों पर नहीं अपितु परिणामों पर आनेवाले कल की व्याख्या करते हैं --इसलिए मैं स्वयं को वैज्ञानिक ज्योतिषी अथवा "टाइम स्पेशलिष्ट "कहता हूँ  ।।
       भवदीय ---ज्योतिष एवं कर्मकांड विशेग्य {पंडित कन्हैया लाल झा शास्त्री "} किशन पूरी धर्मशाला देहली गेट मेरठ {उत्तर प्रदेश }{ निःशुल्क ज्योतिष सेवा रात्रि ८से ९ रात्रि ,{एकबार] फेसबुक पर कोई भी मित्र बनकर प्राप्त कर सकते हैं  ।नोट --कृपया सिगलन मिलते ही फ़ोन से लाभ लें ,न कि जबाब का इंतजार करें ।
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शुक्रवार, 29 मार्च 2013

"शनि की साढ़ेसाती विचार -कुंडली में आपके पैरों के प्रभाव ?

-जिस राशि में शनि भ्रमण करता है उससे बारहवी और दूसरी राशि को  भी त्रस्त {पीड़ित}  करता है |तीन राशियों का भोगकाल साढ़ेसात वर्षों का होता है |शनि की साढ़ेसाती लगने से -१०० दिनों तक जातक के मुख पर प्रभाव रहता है --ये हानिकारक होता है |ऐसे ही ४०० दिनों तक दक्षिण भुजा  पर शनि का प्रभाव रहता है --जो जातक को विजय दिलाता है | ६०० दिनों तक जातक के चरणों में शनि का प्रभाव रहता है -जो जातक को यत्र -तत्र भ्रमण कराता रहता है | ४०० दिनों तक वामभुजा के ऊपर शनि का प्रभाव रहता है -जो जातक को -दुःख प्रदान करता है | ५०० दिनों तक जातक के उदार पर शनि का प्रभाव रहता है -जो जातक को लाभ देता है | ३०० दिनों तक जातक के मस्तक पर शनि का प्रभाव रहता है-जो जातक को राज्य का लाभ दिलाता है | २०० दिनों तक जातक के नेत्रों पर शनि का प्रभाव रहता है -जो जातक को दुःख प्रदान करता है |२०० दिनों तक गुदा में प्रभाव रहता है शनि का -जो जातक को दुःख प्रदान करता है --इस प्रकार से २७०० दिनों तक शनि की साढ़ेसाती रहती है -जो समयानुसार -क्रम से जातक को लाभ या हानी देती है ||
----जातक के जन्म होते ही अभिभावक -अपने शिशु के पैर की कुंडली में प्रभाव देखते है --जब जातक जन्म लेता है -तो चंद्रमा की स्थिति से पैरों की जानकारी मिलती है -कुंडली के -१,६,११ भाव में चन्द्रमा हो तो -शिशु के स्वर्ण पैर होते हैं -प्रभाव -हानिकारक माना जाता है |२,५,९ भाव में चन्द्रमा होने से -रजत पैर माने जाते हैं -जो लाभदायक होते हैं |३,७,१० भाव में चन्द्रमा होने पर -ताम्बे के पैर होते हैं जो -उत्तम माने जाते हैं | ४,८,१२ भाव में चन्द्रमा होने पर -लोहे के पैर माने जाते हैं -जो हानिकारक होते हैं |
   ----"{लोहे धन विनाशः स्यान्सर्व सौखयम च } ---भवदीय -पंडित कन्हैयालाल " झा  शास्त्री " {निःशुल्क ज्योतिष सेवा एकबार संपर्क सूत्र द्वारा फेसबुक पर मित्र बनकर प्राप्त कोई भी कर सकते हैं -9 8 9 7 7 0 1 6 3 6 +9 3 5 8 8 8 5 6 1 6 3 6 ---

"अपनी आय की जानकारी "कुंडली " के एकादश भाव से खुद जानें ?"

"अपनी आय की जानकारी "कुंडली " के एकादश भाव से खुद जानें ?"
"प्राचीन काल में -आय की चिंता माता -पिता  को विशेष होती थी ! इस समय आय की चिंता जातक को विशेष होती है ,और होनी भी चाहिये  ,जब हम ज्योतिष की कुंडली के एकादश भाव का चिंतन करते हैं ,तो हमें आय के साधन एवं कितनी होगी आमदनी की जानकारी मिलती है | यूं तो =कुंडली के द्वितीय भाव से भी धन की
जानकारी मिलती है ,किन्तु ="अर्थागमोनित्य"-भाव - आपके पास धन भले ही कितना ही क्यों न हो किन्तु जो धन नित्य प्राप्त होता है उस धन में सुख मिलता है न कि स्थायी धन से | आपके पास चाहे कुंडली हो या न हो -यदि ,मेष या वृश्चिक आपकी राशि है तो २८ साल में भाग्योदय होगा-व्यवसाय आप ,लकड़ी ,तकनीकी ,शिक्षा ,भूमि ,अग्नि संबधी ,एवं सेना क्षेत्र में विशेष लाभ पा सकते हैं ||-वृष या तुला राशि आपकी हो- तो धन आयेगा किन्तु तुलनात्मक भाव से-विशेष प्रगति २६ साल से होगी ||-व्यवसाय आप -कूटनीति ,उद्योग ,सफेद चीज ,न्याय विभाग , तकनीकी की खोज एवं कला के क्षेत्र में आप विशेष सफल हो सकते हैं || कर्क या सिंह  राशि हो -तो भाग्योदय २४ साल के उपरांत होगा ||व्यवसाय आप -राजनीति ,,खोज ,दवाई  ,लकड़ी  ,एवं स्वतंत्र क्षेत्र में आप सफल हो सकते हैं ||-मिथुन या कन्या राशि आपकी है तो -भाग्योदय -३० साल के उपरान्त विशष होगा ||-व्यवसाय आप -तकनीकी ,कला ,संगीत ,व्यापर ,सोंदर्य प्रसाधन ,सामूहिक कार्ज़ ,तथा युगल जोड़ी से व्यवसाय के क्षेत्र में विशेष सफल हो सकते हैं ||-मकर या कुम्भ आपकी राशि हो तो भाग्योदय -३२ साल उपरांत विशेष होगा ||-व्यसाय आप -लोह ,कोयला ,तेल ,तकनीकी ,शेयर मार्केट ,स्वर्ण ,उद्योग ,चमड़ा विज्ञान के क्षेत्र में विशेष सफल होगें || -धनु या मीन राशि आपकी है-तो आप भाग्योदय -२२ साल के बाद शुरू होगा || व्यवसाय आप -शिक्षा ,तकनीकी ,घी ,नेता , मंत्री , पिली वस्तु के उद्योग में विशेष सफल हो सकते हैं ||
भाव -कभी -कभी कुछ दोष के कारण हम किसी भी कार्ज़ में सफल नहीं हो पाते हैं ,और कभी हमें अनायास ही सफलता भी मिल जाती है ,इसके लिये हमें "कुंडली "का अबलोकन जरुर करना पड़ता है ||
        प्रेषकः --ज्योतिष सेवा सदन {मेरठ -भारत }

गुरुवार, 28 मार्च 2013

"अर्पण या समर्पण ,किन्तु है ये घमर्थन?"

  "अर्पण या समर्पण ,किन्तु है ये घमर्थन?"
 ----  मित्र प्रवर ,राम -राम,नमस्कार ,प्रणाम ।
          ----संसार की सभी वस्तुएं निरर्थक है ,ये हम सभी जानते हैं ,किन्तु जीने की "कला "सबकी अलग -अलग होती है | वर्तमान ही भूत एवं भविष्य बन जाता हैं ,और सभी जीव इन तमाम बातों को जानते हुये भी उलझते रहते हैं | हमें आवश्यकता के आगे सत्य भी असत्य सा प्रतीत होता है ||
                --- अर्पण =हमारा जीवन सुखमय कैसे हो इसके लिए हम बहुत से यत्न और प्रयत्न करते रहते हैं | इसके लिए हम -अपने अभिभावक ,मार्गदर्शक एवं ऊपर वाले के ऊपर अटूट आस्था रखते हैं ,उनके बताये हुये मार्ग पर चलते हैं और अपनी संतानों को चलने की प्रेरणा भी देते हैं || किन्तु ये जो हमारा अर्पण है ,वो वास्तविक रूप से अलग हो रहा है |जैसे - माता -पिता,भाई बंधुओं ,अभिभावोकों ,शिक्षक ,तथा गुरु के ऊपर यकीन न करके -उनके ऊपर यकीन कर लेते हैं ,जिनको हम जानते तक नहीं है -उनके विचार को हम सुविचार मानते हैं -जो हमारा हित [कल्याण ] कभी नहीं कर सकते हैं ||
            ---- समर्पण =जब हम दूरदर्शन [टी, व़ी] चलचित्र [सिनेमा ] नेट -[जाल ] के आदि हो गये हैं ,तो निशचित ही मूल रूप को पहचानते हुये  भी -वही राह अपनाते हैं जो दीखता तो उत्तम है ,किन्तु है असत्य का प्रतीक -जैसे -किसी भी वस्तु का मूल रूप तो सत्य होता है -परन्तु परिवर्तन होने से नष्टकारी अर्थात बेकार हो जाता है |जैसे -गेहूं सत्य है किन्तु भोजन के लिए उसका परिवर्तन होता है -गेहूं से आटा एवं आटा से रोटी बनते ही उसका समय सीमित हो जाता है| जब हम चलचित्र देखते हैं -तो ये बातें काल्पनिक है ये हम सभी जानते हैं -किन्तु -मानते उसे सत्य हैं | यही हमारा समर्पण हमें तो भ्रमित करता ही है ,समाज को भी इसी ओर ले जा रहा है ||
              ---- घमर्थन =हम अपने जीवन के मूल रूप को  पहचानते तो हैं ,किंतु उस पथ पर चलने की कोशिश नहीं करते हैं | माता -पिता से उत्तम शुभ चिन्तक ,गुरु से उत्तम मार्गदर्शक ,अपने भाई -बंधुओं से सुन्दर प्रेम , अपने पुरोहित से उत्तम पूजा ,अपने आराध्यदेव से उत्तम देव ,अपने घर से सुन्दर घर ,अपनी संस्कृति से सुन्दर व्यवहार ,अपनी पतनी से सुदर पतनी ,कोई नहीं है ||अर्थात -ये लड़ाई ,या झगडा की चीज नहीं है -ये आत्मा से स्वीकार करने की बात है ||
                                    भवदीय निवेदक "झा शास्त्री "मेरठ [भारत ]
निःशुल्क ज्योतिष सेवा रात्रि ८ से प्राप्त करें ||-सम्पर्कसूत्र -.09358885616+9897701636

बुधवार, 27 मार्च 2013

"प्रचार का अभिप्राय -प्रसार है न कि शर्मसार ?"

"प्रचार का अभिप्राय -प्रसार है न कि शर्मसार ?"
---मित्रप्रवर ,राम राम ,नमस्कार ||
 प्रचार का अर्थ प्रसार होता है ,किन्तु उसका प्रसार तभी संभव होता है ,जब अपने गुण {गुणबत्ता }के कारण लोगों के दिल में अपनी जगह बना लेता है ,किन्तु इसमें समय लगता है ,इसके लिए अपना परिश्रम ,लगन ,विस्वास ,धन के साथ -साथ उपर वाले एवं भाग्य की भी आवशयकता होती है | यदि इन तमाम बातों में से एक भी कम हो जाय तो प्रचार नहीं -शर्मसार हो जाता है ||
 ---- कभी हमलोग सादगी जीवन बिताते थे -तो कारण अनभिज्ञता थी | आज हम अलौकिक जीवन जीते हैं -तो वजह प्रचार ही है |चाहे -परिधान हो ,अलंकरण की वस्तुएं हो ,या रोजमर्रा की चीजें ही क्यों न हो -प्रचार ने हमें -अपने में समेट लिया है ,हम चाहकर भी अपने जीवन में कटोती नहीं कर पाते हैं ||
     ---ज्योतिष एवं ज्योतिषी भी अपने आपको नहीं रोक पाये  ,समय की धारा ने हमें भी अपनी और खीच ली | किन्तु यदि हम -ज्योतिष अर्थात- नेत्र ,नेत्र अर्थात -तेज ,अपने तेज ,अपनी शक्ति के बल पर लोगों के ह्रदय में जगह बना सकते हैं -इसके लिए कर्मठ होना पड़ेगा ,सहनशील भी बनना पड़ेगा ,तप और साधना के द्वरा अपनी डगर पर अडिग रहना पड़ेगा |तभी हम भी प्रचार का प्रसार करेंगें नहीं तो -शर्मसार ही करेंगें ||--यह ज्योतिष सेवा सदन -आपकी सेवा में तत्पर रहता हैं ,रात्रि ८ से ९  सम्पर्कसूत्र द्वरा |
---हम आने वाले सभी मित्रों का निस्वार्थ सेवा करेंगें ,सभी आगंतुक मित्रों का निष्पक्ष मदद करेंगें ,सही राह दिखाएंगें , हम भेद भाव रहित सेवा करते हैं करते रहेंगें ||
    {१}-आप से जुड़कर ,आपके हित के लिए बताकर हमें प्रसन्नता होती है ,किन्तु आप के सहयोग के बिना हम अकेले यह सेवा नहीं कर पायेंगें ,इसलिए ऑनलाइन सेवा नहीं मिलने पर सम्पर्कसूत्र से सेवा लें, सबको सेवा मिलेगी ,देर हो सकती है ||
     {२}-किन्तु -ज्योतिष की सेवा के लिए -ज्योतिष के प्रति आस्था ,विस्वास होने चाहिए ,अन्यथा सेवा न लें ,क्योंकि आप और हम -महर्षियों की जो अद्भुत देन है ,गुरुओं की जो साधना है -उस मार्ग को धन से नहीं विस्वास से ही प्राप्त कर सकते हैं ||----{ भवदीय निवेदक "झा शास्त्री {मेरठ -उत्तर प्रदेश } सम्पर्कसूत्र -,09358885616 +0997701636 

सोमवार, 25 मार्च 2013

"शिवलिंग पूजन का प्रारंभ एवं महत्त्व को जानने की कोशिश करते हैं !"

"शिवलिंग पूजन का प्रारंभ एवं महत्त्व को जानने की कोशिश करते हैं !"
-----दक्ष -प्रजापति ने अपने यग्य में 'शिव" का भाग नहीं रखा ,जिससे कुपित होकर -माँ पार्वती ने दक्ष के यग्य मंडप में योगाग्नि द्वारा अपना शरीर को भस्म कर दिया |यह विदित होने के बाद  -भगवान् "शिव"अत्यंत  क्रुद्ध हो गए एवं नग्न होकर पृथ्वी पर भ्रमण करने लगे | एक दिन वह [शिव ] नग्नावस्था में ही ब्राह्मणों की नगरी में पहुँच गए | शिवजी के नग्न स्वरूप को देखकर भूदेव की स्रियां[भार्या ] उन पर मोहित हो गईं| स्त्रियों की मोहित अवस्था को देखकर ब्राह्मणों ने शिवजी को शाप दे दिया कि-ये लिंग विहीन तत्काल हो जाएँ एवं शिवजी शाप से युक्त भी हो गए ,जिस कारण  से तीनों लोकों में घोर उत्पात होने लगा |
---समस्त देव ,ऋषि ,मुनि व्याकुल होकर ब्रह्माजी की शरण में गए | ब्रह्मा ने योगबल से शिवलिंग के अलग होने का कारण जान लिया और समस्त देवताओं ,ऋषियों ,एवं मुनियों को साथ लेकर शिवजी के पास गए -ब्रह्मा ने शिवजी से प्रार्थना की कि -आप अपने लिंग को पुनः धारण करें -अन्यथा तीनों लोक नष्ट हो जायेंगें | स्तुति को सुनकर -भगवान् शिव बोले -आज से सभी लोग मेरे लिंग की पूजा प्रारंभ कर दें ,तो मैं अपने लिंग को धारण कर लूँगा | शिवजी की बात सुनकर सर्वप्रथम ब्रह्मा ने सुवर्ण का शिवलिंग बनाकर उसका पूजन किया | पश्चात देवताओं ,ऋषियों और मुनियों ने  शिवलिंग बनाकर पूजन किया | तभी से शिवलिंग के पूजन का प्रारंभ हुआ ||जो लोग किसी तीर्थ में -मृतिका - के शिवलिंग बनाकर -उनका हजार बार अथवा लाख या करोड़ बार सविधि पूजन करते हैं-वे शिव स्वरूप हो जाते हैं || जो मनुष्य तीर्थ में मिटटी ,भस्म ,गोबर अथवा बालू का शिवलिंग बनाकर एक बार भी उसका सविधि पूजन करता है -वह दस हजार कल्प तक स्वर्ग में निवास करता है ||-शिवलिंग का विधि पूर्वक पूजन करने से -मनुष्य -संतान ,धन ,धान्य  ,विद्या ,ज्ञान ,सद बुद्धि ,दीर्घायु ,और मोक्ष की प्राप्ति करता है ||--जिस स्थान पर शिवलिंग का पूजन होता है ,वह तीर्थ नहीं होते हुआ भी तीर्थ बन जाता है | जिस स्थान पर शिवलिंग का पूजन होता है ,उस स्थान पर जिस मनुष्य की मृत्यु होती है-वह शिवलोक को प्राप्त  करता है | जो शिव -शिव ,शिव नाम का उच्चारण करता है -वह परम पवित्र एवं परम श्रेष्ठ हो जाता है ||--भाव -जो मनुष्य शिव -शिव का स्मरण करते हुए प्राण त्याग देता है -वह अपने करोड़ों जन्म के पापों से मुक्त होकर शिवलोक को प्राप्त करता है ||
शिव =का - अर्थ है -कल्याण || "शिव "यह दो अक्षरों वाला नाम परब्रह्मस्वरूप एवं तारक है इससे भिन्न और कोई दूसरा तारक नहीं है --{"तारकं ब्रह्म परमं शिव इत्य्क्षर द्वयं |नैतस्मादपरम किंचित तारकं ब्रह्म सर्वथा ||}
--भवदीय निवेदक "झा शास्त्री " मेरठ [उ0प 0]
निःशुल्क ज्योतिष सेवा रात्रि ८ से ९ संपर्क सूत्र द्वारा प्राप्त करें--= -09897701636+9358885616 

शनिवार, 23 मार्च 2013

"अहोरात्र अर्थात "होरा चक्र से सप्तवारों का सम्बन्ध जानते हैं ?"

"अहोरात्र अर्थात "होरा चक्र से सप्तवारों का सम्बन्ध जानते हैं ?"
आकाश मंडल में शनि गुरु [बृहस्पति ],मंगल ,रवि ,शुक्र बुध और चंद्रमा ,इन सातों ग्रहों की स्थिति क्रमशः एक दुसरे से नीचे मानी गई है,अर्थात शनि की कक्षा सबसे ऊपर है |शनि से नीचे गुरु ,गुरु से नीचे मंगल ,मंगल से नीचे सूर्य ,सूर्य से नीचे शुक्र ,शुक्र से नीचे बुध तथा बुध से नीचे चंद्रमा की कक्षा है ||
एक दिन -रात्र में २४ होराएँ होती हैं ,अर्थात प्रत्येक होरा १ घंटे के बराबर होती है | घंटे का दूसरा नाम "होरा "है ,यह भी कहा जा सकता है | प्रत्येक होरा का स्वामी नीचे की कक्षा के क्रम से एकेक ग्रह होता है ||
सृष्टि के प्रारंभ में सबसे पहले "सूर्य " दिखलाई पड़ता है ,अतः पहली होरा का स्वामी सूर्य को माना गया है,इसलिए सृष्टि का पहला दिन सूर्य के दिन रविवार ,के नाम से पुकारा जाता है | उसके पश्चात प्रत्येक होरा [घंटे ] पर एकेक ग्रह का अधिकार रहता है ,अर्थात उस दिन की दूसरी होरा का स्वामी सूर्य के समीप वाला ग्रह "शुक्र ",इसी प्रकार तीसरी होरा का स्वामी बुध ,चौथी होरा का स्वामी -चंद्रमा ,पांचवीं होरा का स्वामी -शनि ,छठी होरा का स्वामी -गुरु ,सातवीं होरा का स्वामी -मंगल ,आठवीं होरा का स्वामी फिर से सूर्य ,नौवीं होरा का स्वामी फिर शुक्र ,दसवीं होरा का स्वामी फिर बुध ,इसी प्रकार क्रम चलता रहता है | पहले दिन की होरा सूर्य से आरम्भ होती है तथा २४ विन बुध पर समाप्त होती है |\
दुसरे दिन की पहली होरा का स्वामी उपर्युक्त क्रम से चंद्रमा होता है ,अतः दुसरे दिन को चंद्रवार अथवा सोमवार कहा जाता है |इसी क्रम से तीसरे दिन की पहली होरा का स्वामी मंगल होता है अतः उसदिन को मंगलवार कहा जाता है | चौथे दिन की पहली होरा का स्वामी बुध होता है ,अतः उस दिन को बुधवार कहा जाता है |पांचवे दिन की पहली होरा का स्वामी गुरु होता है ,अतः उस दिन को गुरूवार कहा जाता है |छठे दिन की पहली होरा का स्वामी शुक्र होता है ,अतः उस दिन को शुक्रवार कहा जाता है |सातवे दिन की पहली होरा का स्वामी शनि होता है ,अतः उस दिन को शनिवार कहा जाता है ||
        नोट - -इसी क्रम से आठवे दिन की पहली होरा -सूर्य आ जाती है ,अतः आठवा दिन फिर रविवार के नाम से पुकारा जाता है इसी प्रकार क्रमशः [१]-सूर्य ,[२]-चन्द्र ,[३]-मंगल ,[४]-बुध ,[५]-गुरु ,[६]-शुक्र ,[७]-शनि ये सातों ग्रह दिन की पहली होरा के स्वामी होते हैं | यह क्रम निरंतर चलता रहता है ,इसलिए इन सातों  ग्रहों की प्रथम होरा के आधार पर सात  दिनों [सप्ताह ]के नाम रखे गये हैं ||
        भवदीय निवेदक -ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री "----निःशुल्क ज्योतिष सेवा रात्रि ८ से ९ मित्रता से प्राप्त करें ||संपर्क सूत्र -9897701636,09358885616---

शुक्रवार, 22 मार्च 2013

"शारीरिक अवयव और राशि मंडल ?"---

"शारीरिक अवयव और राशि  मंडल ?"---
        ----"ज्योतिष को नेत्र की उपाधि से विभूषित किया गया है| साथ ही हमारे अवयवों पर भी ज्योतिष के ग्रहों का प्रभाव पड़ता है ,यदि कुंडली के किसी भाव में शक्ति विहीन ग्रह हों तो -उस स्थान की पीड़ा हमें सहनी पड़ती है या किसी भाव में बलिष्ठ ग्रह हों - तो -उस स्थान या उस स्थान के अवयव हमें प्रसन्नता प्रदान करते हैं "!!
      अस्तु -भचक्र में स्थित १२ राशियों के समस्त राशि  -मंडल को एक बृहत् [विराट ] काल पुरुष मानते हुए -मेष को -शिर ,वृष को-मुख ,मिथुन को बाहु तथा गला या बक्षस्थल ,कर्क -को ह्रदय ,सिह को -पेट ,कन्या - राशि  को-पेट का नीचे का भाग -कटी [कमर ],तुला को वस्ति ,तथा जननेंद्रिय ,वृश्चिक को गुदा ,धनु को -कुल्हे तथा जांघ ,मकर को घुटने ,कुम्भ को -पिंडलियाँ और मीन को पैर =यह शरीर  के बाहरी अवयवों का विभाग है |=भीतरी अवयवों पर भी १२ राशियों का क्रमशः निम्नलिखित प्रकार से आधिपत्य पड़ता है या रहता है ||
[१] मेष -मस्तिक [दिमाग ]|[२]-वृष -कंठ की नली [टांसिल ][३]-मिथुन -फेफड़े [स्वास लेना ][४]-कर्क -पाचन शक्ति[५]-सिह -ह्रदय |[६]-कन्या -अन्तरियां-[पेट के भीतर का निचला भाग ][७]-तुला -गुर्दे[८]-वृश्चिक -मूत्रेंद्रिय ,जननेंद्रिय |[९]धनु -अनायु -मंडल तथा नसें जिनमें रक्त प्रवाहित होता रहता है |[१०]-मकर -हड्डियाँ तथा अंगों के जोड़ |[११]-कुम्भ -रक्त तथा रक्त प्रवाह |[१२]-शारीर में सर्वत्र [सभी जगह ] कफोत्पादन |
   -----भाव -जन्म के समय -जिस राशि  में शुभ ग्रह होते हैं ,शरीर का वो भाग पुष्ट [सुन्दर ] होता है | तथा जिस भाव में पापग्रह या नीच ग्रह होते हैं -शरीर  का उससे से सम्बंधित भाग कृष या रोगयुक्त ,एवं पीड़ित होता है ||
     ----भवदीय निवेदक "झा शास्त्री"
निःशुल्क "ज्योतिष "सेवा रात्रि ८ से ९ मित्रता से प्राप्त करें ||{एकबार }
संपर्क सूत्र -09897701636,09358885616,

गुरुवार, 21 मार्च 2013

" विशाल नभ की परिधि -२७ नक्षत्र एवं नवग्रह हैं- क्यों ?"

" विशाल नभ की परिधि -२७ नक्षत्र एवं नवग्रह हैं- क्यों ?"
इस विराट आकाश में असंख्य तारागण हैं,तो फिर भारतीय ज्योतिष ने अपने गणित एवं फलित आदि में २७ नक्षत्र और ९ ग्रहों को ही प्रधानता क्यों दी है ? यह शंका आपके मन में  उत्पन्न हो सकती है -तो आपकी इस शंका का समाधान के लिए ज्योतिष के ग्रंथो में हमने अनुभव किया -
 ---- आकाश में एक प्रायः गोल मार्ग है | इस मार्ग में पृथ्वी १,१०० मील प्रति घंटे की गति से निरंतर चक्कर लगाया करती है |--आकाश में कोई सड़क -मार्ग तो है नहीं , न ही वहां मील के मापक पत्थर ही लगे हैं ,तब यह कैसे पता चले कि पृथ्वी कितना चल चुकी है और अब कहाँ है ? इस समस्या को हल करने के लिए ,जिस मार्ग पर पृथ्वी घुमती है,उस पर या उसके आसपास स्थित नक्षत्रों को चुन लिया गया है | ये स्थिर नक्षत्र हैं | ग्रह तो घूमते रहते हैं किन्तु नक्षत्र अपने स्थान पर स्थिर रहते हैं |
      ----इन नक्षत्रों से वो ही काम लिया जाता है ,जो दूरी जानने के लिए मील के पत्थरों से लिया जाता है | इस प्रकार पृथ्वी के गोलाकार मार्ग को २७ नक्षत्रों में बाँटने की व्यवस्था इसलिए की गयी है ,जिससे कि आकाश में निश्चित स्थान का निर्देश किया जा सके | एक विशेष बात यह भी है कि आकाश -मंडल में असंख्य तारों के समूहों द्वारा जो विभिन्न प्रकार की आकृतियाँ बनती हैं ,उन्हीं आकृतियों ,अर्थात ताराओं के समूह को नक्षत्र कहा जाता है ,तथा प्रत्येक नक्षत्र का नाम रख दिया है -
[१]अश्विनी [२]-भरणी[३]-कृतिका [४]-रोहिणी [५]-मृगशिरा [६]-आर्द्रा[७]-पुनर्वसु [८]-पुष्य [९]-आश्लेषा [१०]-मघा [११]-पूर्वाफाल्गुनी [१२]-उत्तराफाल्गुनी [१३]-हस्त [१४]-चित्रा [१५]-स्वाति [१६]-विशाखा [१७]-अनुराधा [१८]-ज्येष्ठा [१९]-मूल [२०]-पूर्वाषाढ़ा [२१]-उत्तराषाधा [२२]-श्रावण [२३]-धनिष्ठा [२४]-शतभिषा [२५]-पूर्वाभाद्रपद [२६]उत्तराभाद्रपद [२७]-रेवती ||
-------नोट किसी समय वैदिक काल में उत्तराशाधा और श्रवण के बीच में अभिजीत नामक नक्षत्र की गणना और की जाती थी | किन्तु अब २७ नक्षत्रों के अतिरिक्त २८ वन नक्षत्र "अभिजीत " भी माना जाता है | उत्तराषाधा की अंतिम १८ घटी तथा श्रवण के प्रारंभ की ४ घटी ,इस प्रकार कुल १९ घाटियों के मान वाला नक्षत्र अभिजीत है | सामान्यतः -१ नक्षत्र की ६० घटी होता है ||
      ---निवेदक ज्योतिष सेवा सदन "झा शास्त्री " मेरठ |
संपर्कसूत्र -9897701636+9358885616--,निःशुल्क ज्योतिष सेवा रात्रि ८ से ९ ऑनलाइन प्राप्त करें{एकबार }

शुक्रवार, 1 मार्च 2013

"ज्ञान प्रदाता ,अविष्कार कर्ता होती है -मीन -राशि {-2013=विशेष ]"

"ज्ञान प्रदाता ,अविष्कार कर्ता होती है -मीन -राशि {-2013=विशेष ]"-----वर्ष -2013 में --बनते -बिगड़ते परिवेश में नये रास्ते मिलेंगें ।दोस्त आपका मन चाहा मदद करेंगें ।आलस्य और प्रमाद से बचें ।अभिभावक तथा अधिकारीयों की हाँ में हाँ मिलाने में हित होगा ।सामजिक और राजनितिक क्षेत्र में दबदबा बना रहेगा ।धन प्राप्ति का नया मार्ग मिलेगा ।दोस्त ,सगे सम्बन्धियों से प्रेम बढेगा ।देश -विदेश की सुखद यात्रा होगी ।चल -अचल संपत्ति का विशेष योग है ।मंगलोत्सव से सालभर प्रसन्नता रहेगी ।रचनात्मक कार्यों में रुझान बढेगा ।दिया हुआ सामान या धन देर से जरुर मिलेगा ।समय के साथ कार्य उचित रहेगा करना ।अनजान लोगों से दोस्ती न करें अहित होगा ।पशु ,वाहन ,वाहन ,भवन इत्यादि का विस्तार होगा ।पुराना विवाद को समयानुसार सुलझा लें ।अनावश्यक परिचर्चा से बचें ।भौतिक सुखोपभोग की वस्तु खरीदेंगें ।अतीत के सन्दर्भ में अनुसंधान से लाभ होगा ।स्वास्थ के साथ समझौता न करें अहित होगा ।खरीद -फ़रोख्त के कारोबार में लाभ होगा ।घर में मेहमान के आगमन से नई ख़ुशी मिलेगी ।संतान सुख की प्राप्ति होगी ।राजकीय सहयोग अपर्याप्त रहेगा ।लम्बी लाभकारी योजना में धन का व्यय होगा ।साझीदार कुछ गड़बड़ी करेंगें ।घर -परिवार में लगे रहेंगें सालभर ---नव वर्ष मंगलमय हो ?"
   नोट ------धन ,स्वास्थ ,सम्पत्ति ,माता ,सही रहे सके लिए -----{1}पुखराज या सुनहला स्वर्ण में धारण करें --धनाभाव हो तो -----स्वर्ण ,रजत और ताम्र का छल्ला पुष्य नक्षत्र में अनामिका या तर्जनी अंगुली में धारण करें ।गुरूवार  को सात्विक भोजन करें ।गुरूवार को ईष्ट पुष्प का इष्ट पर अर्पण से भी लाभ हो सकता है ।
     --------आपका ---ज्योतिष सेवा सदन --कार्यालय -कृष्णपुरी धर्मशाला मंदिर देहली गेट मेरठ -उत्तर प्रदेश -भारत ।संपर्क-09897701636+09358885616----पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री "--ज्योतिष आजीवन जानकारी केवल -11.00- में प्राप्त करें ।

"निर्माण एवं प्रणेता होती है -{कुम्भ -राशि -2013=विशेष }

"निर्माण एवं प्रणेता होती है -{कुम्भ -राशि -2013=विशेष }-----2013 साल में रोजमर्रा के कामों में उन्नति होगी ।आपकी लक्ष्मी और सम्मान से नाखुश रहेंगें सगे सम्बन्धी ।भूमि -वाहनादि का लेन -देन फायदे में रहेगा ।मंगलोत्सव मिलन होगा ।शादी की बात से प्रसन्नता मिलेगी ।साल में कटुता -विवाद के बाद प्रेम का आहसास होगा ।स्वास्थ के लिए संयमित रहें अन्यथा हानि होगी ।भविष्य में रचनात्मक कायों में सफलता मिलेगी ।देश -विदेशों से सुखद समाचार मिलेगा ।घर -परिवार में उत्सव का माहौल बनेगा ।अनावश्यक व्यय से बचें ।समाज और कार्य क्षेत्र में मान सम्मान बढेगा ।दूर या समीप की यात्रा होगी जो सुखद रहेगी ।पुराने -रोग और ऋण से छुटकारा मिलेगा ।नये कार्यों में पूंजी का निवेश कम करें ।धार्मिक -सामाजिक कार्यकरने का अवसर मिलेगा ।ज्ञान अर्जन अर्थात  शिक्षा के क्षेत्र में लाभ होगा ।दोस्ती में नई उम्मीद की आशा जागेगी ।कर्म क्षेत्र एवं उद्योग में सफलता मिलेगी ।अधुरा काम पूरा होगा ।ग्रहचाल की अनुकूलता से लाभ मिलेगा ।कोई गुमराह कर सकता है -अतः सावधान रहें ।समय के साथ चलें उचित रहेगा ।सही दिशा -निर्देश से ही लाभ होगा ।प्रसन्नता के मध्य दुःख भी झेलना पड़ेगा ।अनपेक्षित आवागमन से कष्ट भी मिलेगा ।आलस्य और प्रमाद से अवनति होगी ।इस वर्ष आशा निराशा का बराबर योग है ।कारोबार में प्रत्येक कार्य सोच बिचारकर ही करें ।उलझन का निबारण हो जायेगा ।
----नव वर्ष मंगलमय हो ?----{1}-नीलम या नीली अपनी सक्षमता के अनुसार धारण कर सकते हैं ।काला रंग अवश्य ग्रहण करें शनिवार को ।साधना देवी की करें -या इष्ट की ।दान -घट या जलपात्र का भर कर करें शनिवार को उचित रहेगा ।
-------भवदीय ज्योतिष सेवा सदन {पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री "}किशनपुरी धर्मशाला देहली गेट मेरठ उत्तर प्रदेश ।ज्योतिष अनुभव हेतु ---09897701636+09358885616---!!

" स्थिर +दूरदर्शी एवं निति निपुन होती है -मकर -राशि ={2013-विशेष }

" स्थिर +दूरदर्शी एवं निति निपुन होती है  -मकर -राशि ={2013-विशेष }------2013--में समय के साथ चलना पड़ेगा ।भाग्य का परिवर्तन आपकी अथक कोशिश और मेहनत होगा ।संभव हो बड़ी यात्रा न करें ।साहित्य ,संगीत का आनंद मिलेगा ।नित नयेपन का का अहसास होगा ।राज -समाज में सम्मान के साथ -साथ प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी ।धन प्राप्ति का योग बनेगा ।स्थानान्तरण आपके हित में रहेगा ।पुराना विवाद समाप्त होगा -अथक कोशिश से ।वर्ष के पूर्व में असफलता और अंत में सफलता मिलेगी ।सोची -समझी योजना सफल होगी ।पूर्व की अपेक्षा आय विशेष होगी ।घर में नूतन मेहमान का आगमन से प्रसन्नता होगी ।दाम्पत्य सुख ,संतान से प्रसन्नता ,वाहन +संपत्ति के  विशेष योग हैं ।परिवार में क्लेश न करें ।धार्मिक अवसर के साथ -साथ मनोरजन की भी प्रति होगी ।साझे कारोबार से लाभ की आशा करें ।उधार में गया धन अथक परिश्रम से मिलेगा ।परीक्षा में सफलता मिलेगी ।नौकरी का योग है ।उद्योग से मिला जुला हित होगा ।परिवार में सरस माहौल से सम्पन्नता आयेगी ।भूमि -उद्योग एवं पशुओं के योग भी हैं ।साल के ग्रहचाल आपके लिए सुखद है ।गोचर ग्रहों के योग से भाग्य बदलेगा अर्थात उन्नति होगी ।अपने शत्रुओं से सावधान रहें अहित हो सकता है ।मन को शांत जरुर रखें --अफालता में देर भले ही हो जीत पक्की मिलेगी ।------नोट --शिक्षा +संतान से प्रसन्नता के लिए --ऊपर वाले और कर्म पर भरोसा रखें ।शत्रुतासे बचने के लिए -गुरु की उपासना करें ।कर्मक्षेत्र +पिता से मधुर सम्बन्ध बना रहे इसके लिए -मन स्थिर रखें ।
   {1}-गुरुवार को शाकाहारी भोजन और गाय की सेवा अवश्य करें ।
   {2}-कर्मक्षेत्र -के लिए --बुधवार को मछलियों को भोजन कराना हित में होगा ।---काला वस्त्र धारण करें ,नीलम या नीली परखकर धारण करें ---देवी की उपासना करें ।
निवेदक ---ज्योतिष सेवा सदन {पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री "{मेरठ -भारत }

            ज्योतिष जानकारी हेतु --09897701636-----!!

"दया +धर्म और विवेकवान होती है -धनु -राशि -{2013-विशेष }

"दया +धर्म और विवेकवान होती है -धनु -राशि -{2013-विशेष }----2013-में बनते -बिगड़ते परिवेश में नया कुछ करने को मिलेगा ।साथी ,अधिकारी आपके रास्ते में परेशानी खड़ी करेंगें ।अनावश्यक व्यय भार से बचे रहें ।समय के अंतराल में इच्छित सहयोग मिलने से मन खुश रहेगा ।घर -गृहस्थी का भार उठाने में सक्षम हो जायेंगें ।लम्बी योजना में धन सोचकर लगायें ।अपने कुटुंब -परिवार वालों से सहयोग मिलेगा ।धन प्रप्ति का नया मार्ग मिलेगा ।दोस्तों के साथ देश -विदेश या धार्मिक यात्रा होगी जो मन को आनंद प्रदान करेगी ।परिवार में नई ख़ुशी मिलेगी ।स्वास्थ के प्रति ध्यान दें ।पूर्व की अपेक्षा आमदनी बढ़ेगी ।दोस्ती में सौदा अच्छा पटेगा ।नया कुछ करने से राजनितिक और सामाजिक रिश्तों में सुधार होगा ।संपर्कों से फायदा उठाने में आप सक्षम होंगें ।शत्रु षड्यंत्र से हानि होगी ।भूमि -वाहन आदि का लेन -देन हित में रहेगा ।साझे कारोबार का योग बनेगा ।गृह खर्च में वृद्धि होगी ।मेहनत से सफलता मिलेगी ।देश -विदेशों से सुखद समाचार अथवा लाभ का योग बनेगा ।ग्रह की अनुकूलता से भौतिक समृद्धि बढ़ेगी ।पदोन्नति होगी ।बछो से प्रसन्नता मिलेगी ।घर -परिवार में ख़ुशी का समय आयेगा ।अतिथियों का आवागमन से सुख मिलेगा ।समाज सेवा एवं धार्मिक कार्य करेंगें ।शिक्षा से सफालता मिलेगी ।।  -नोट -----शिक्षा ,संतान और अत्यधिक आय हो इसके लिए --पुखराज या सुनहला अथवा धन के आभाव में माता ,पिता या गुरुजनों का नित्य आशीर्वाद हितकर रहेगा ।-पीत वस्त्र श्री खंड का चन्दन का उपयोग भी कर सकते हैं ।-शिक्षा सम्बंधित वस्तुओं का अर्पण शिक्षार्थी को करें -जैसे -लेखनी ,पुस्तिका ।।
   -----भवदीय -ज्योतिष सेवा सदन {पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री"{मेरठ -भारत }
               ज्योतिष जानकारी हेतु -09897701636+09358885616

"रक्षा में निपुण और आत्मबल की धनि -वृश्चिक-राशि -{2013-विशेष }


"रक्षा में निपुण और आत्मबल की धनि -वृश्चिक-राशि -{2013-विशेष }
-----इस वर्ष -अचानक धन लाभ मिलने की ख़ुशी मिलेगी ।बदलाव की प्रतिक्रिया आपके अनुकूल रहेगी ।राजनैतिक -सामाजिक मान सम्मान में वृद्धि होगी ।बनते -बिगड़ते परिवेश में नये आयाम मिलेंगें ।दोस्त से मदद मिल सकती है ।कार्य क्षेत्र में नया संपर्क फायदा देगा ।प्रतियोगिता परिणाम आपके अनुकूल रहेगा ।राज -समाज में सम्मान की उपलब्धि मन को खुश करेगी ।अनपेक्षित आगंतुकों से क्षोभ उत्पन्न होगा ।दूर -समीप की यात्रा होगी ।देश -विदेशों से सुखद समाचार मिलेगा ।पुराने परिचित से मिलन सुखद रहेगा ।क़ानूनी विवाद ले देकर सुलझ जायेगा ।इष्ट मित्रों से अपेक्षित सहयोग मिलेगा ।खरीद -फरोख्त के कारोबार में तरक्की होगी ।उधार गई वस्तु मिल जायेगी ।स्वास्थ  के प्रति सजग रहें ।नये काम में उलझना होगा ।शिक्षा के लिए अतिरिक्त धन व्यय करना पड़ेगा ।दोस्तों से अंतर विरोध न करें ।इच्छित भूमि ,वाहनादि का लेन देन फायदे में रहेगा ।अधिकारी से सावधान रहें ।श्री वृद्धि से शत्रुता होगी ।कार्य क्षेत्र में नया समझौता लाभदायक रहेगा ।साथी पदोन्नति में सहायक होगा ।साहित्य .संगीत एवं ललित कलाओं के क्षेत्र में रूचि जागेगी ।सुखोपभोग में वृद्धि होगी ।पुरानी निराशा आशा में बदलेगी ।इस वर्ष आनंद की अनुभूति होगी ।दाम्पत्य जीवन में क्लेश न करें ।------नोट -खर्च से बचें ,शत्रुता न करें ,
{1}---मूंगा ,मोती  रत्न के साथ धारण उचित रहेगा । मंगलवार को लाल वस्त्र धारण करें,किसी भी इष्ट की आराधना मंगलवार को करने से -लक्ष की प्राप्ति होगी ।
      --भवदीय -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री {मेरठ -भारत }
           ज्योतिष जानकारी हेतु सूत्र --09897701636+09358885616----!!

"नीति निपुण और कर्मशील होती है -{तुला -राशि -2013=विशेष }"

"नीति निपुण और कर्मशील होती है -{तुला -राशि -2013=विशेष }"---इस -2013 साल में -अचानक लाभालाभ का सुयोग चालू होगा ।अपने कर्तव्य का निर्वाह अवश्य करें ।बेकार की बातों पर ध्यान न दें ।सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में प्रभाव बढेगा ।उधार गया धन अवश्य मिलेगा ।आगम अर्थात भाग्य का साथ होगा और नया रास्ता मिलेगा ।मंगल उत्सव और मिलन से मन प्रसन्न होगा ।न चाहते हुए भी यात्रा अर्नी पड़ेगी किन्तु लाभदायक होगी यात्रा ।लाभ और उन्नति की रूप रेखा बनेगी ।बढ़ते उत्तर दायित्व को संभालने का अवसर मिलेगा ।दोस्तों के साथ भ्रमण करने का अवसर मिलेगा ।सोची समझी योजना पूर्ण होगी ।मेहनत  के कारण भाग्य साथ देगा अर्थात भाग्योदय होगा ।साझीदारी इस साल उचित नहीं रहेगी ।व्यवसाय में कोई समझौता मील पत्थर साबित होगा ।इस वर्ष ग्रहचाल खास लाभदायक है इस कारण अनेक लाभ के अवसर आयेंगें ।कोई आपको गुमराह भी कर सकता है सावधान रहें ।इस वर्ष मन नया कुछ करने में लगा रहेगा और आपके साथी आपका सहयोग करेंगें ।स्वास्थ बेहतर रहेगा ।क़ानूनी विवाद नया मोड़ लेगा ।अधिकारी परेशान करेंगें ।दोस्ती में प्रेम बनेगा ।अपने से उच्च अधिकारी पर विशेष निगरानी रखनी चाहिए ।-संपत्ति का योग है ,वाहन ,भवन के साथ -साथ संतान की भी प्राप्ति होगी ।
   ---नोट -चोट अग्निभय से बचे रहें ,झट निर्णय न लें ------{1}-प्रत्येक बुधवार या शनिवार को -नारियल का सूखा गोला में चीनी भर दें और लाल धागा से लपेट दें अपने ऊपर उतर कर पीपल ली जड़ में गार दें ।
---{1}-हीरा और घोड़े की नाल का छल्ला धारण करना उचित रहेगा ।शुक्रवार को खटाई न खायें ।सफेद वस्त्र धारण करें ।
प्रेषकः -पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री "{मेरठ -भारतीय }

"पारस्परिक सम्बन्ध और सुनदर आकृति की धनि -कन्या राशि -विशेष 2013}"?

"पारस्परिक सम्बन्ध और सुनदर आकृति की धनि -कन्या राशि -विशेष 2013}"?

-------इस वर्ष -2013 में अर्थलाभ का विशेष सुयोग है ।राज -समाज में मान -सम्मान बढेगा ।नित्य आनंद का अनुभव होगा ।कारोबार में मुनाफा मन खुश करेगा ।असफलता के बाद सफलता मिलेगी ।शादी -पार्टी में जाने का विशेष अवसर मिलेगा ।पुराना विवाद ले देकर {क़ानूनी झंझट }सुलझ जायेगा ।कार्यपूर्ति हेतु अपेक्षित सहयोग मिलेगा ।पदोन्नति से मन प्रसन्न रहेगा ।घर में नये मेहमान के आगमन से खर्च बढेगा ।सेहत का उचित ध्यान रखें ।कार्यक्षेत्र में बदलाव होगा ।अतीत की सोची रणनीति सफल होगी ।दोस्तों से अनुकूल मदद मिलेगी ।राजकीय सहयोग न के बराबर मिलेगा ।दूसरे के सहयोग अथवा समझ से लाभ उठाने में आप सफल होंगें ।जमा पूंजी बढ़ेगी ।आगम प्राप्ति का नया रास्ता मिलेगा ।ग्रहचाल इस वर्ष आपके अनुकूल होगी ।देश -देशांतर से सुखद समाचार मिलेगा ।व्यापार में अच्छा खासा लाभ मिलेगा ।बेकार के झगडे झमेले से बचें ।मेहनत से भाग्य चमकेगा ।उधार या दूसरों के अधीन आपकी मुद्रा या संपत्ति मिलेगी ।बढ़ते जनसंपर्क का लाभ मिलेगा ।लाभदायक योजना में पूंजी खर्च होगी ।भाग्य में सफलता निश्चित जानें ।परस्पर कटुता या विवाद न करें ।दाम्पत्य सुख मिलेगा ।संपत्ति ,वाहन ,एव यात्रा का अनुपम योग बनेगा ।।

-----------नोट--पन्ना और हीरा रत्नों से आपकी सोभा और भी बढ़ जायेगी ,अल्प धन होने पर -जरकिन या स्फटिक की माला धारण करने से लाभ होगा ।

{1}-पारस्परिक व्यापार के लिये -युगल जोड़ी तुलसी की माला भी लाभदायक रहेगी ।हरा रंग उत्तम रहेगा ।

{2}-चिड़ियों को दाना ,किसी भी जीव को जल की सेवा से समस्त लाभ प्राप्त कर सकते हैं ।

प्रेषकः --पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री {मेरठ -भारत }

आजीवन ज्योतिष लाभ केवल -11.00- में प्राप्त कर सकते हैं ।सूत्र -098978701636+09358885616------!!

"स्वतंत्र कार्य ,नेत्रित्व में उपयुक्त -सिंह -राशि -2013=विशेष }"

"स्वतंत्र कार्य ,नेत्रित्व में उपयुक्त -सिंह -राशि -2013=विशेष }"----वर्ष 2013--में भाग्य विकास का सुयोग बनेगा ।अचानक धन लाभ की रूप रेखा बनेगी ।निराशा आशा में बदल जायेगी ।परिवार में मंगलोत्सव का संयोग बनेगा ।आपकी मेहनत रंग लायेगी ।स्वस्थ के प्रति सावधान रहें हानि हो सकती है ।संभव हो तो लम्बी यात्रा न करें टालने की कोशिश करें हानि से बचे रहेंगें ।जीवन साथी का पूर्ण सहयोग मिलेगा ।देव दर्शन की यात्रा होगी ।उधार में गई वस्तु मिल जयेगी ।भौतिक वस्तु सुविधा के अनुसार आयेगी ।क़ानूनी विवाद में नया मोड़ आयेगा ।भूमि -वाहन तथा पशु लेन -देन फायदेमंद रहेगा ।देश -विदेशों से सुखद समाचार मिलेगा ।आपको कोई गुमराह करने की कोशिश करेगा ।कटुता एवं विवाद से बचें रहें ।रचनात्मक कामों में रूचि बढ़ेगी ।मंगलोत्सव की सूचना मन को खुश करेगा ।दोस्ती में घनिष्ठता से बचें ।प्रतियोगिता परिणाम उत्तम रहेगा ।भाग्य का विशेष विकास होगा ।पदोन्नति होगी जिससे मन प्रसन्न रहेगा ।घर -गृहस्थी में में चहल -पहल बढ़ेगी ।व्यवसाय में तरक्की के नये रास्ते मिलेंगें ।मेहमान के आगमन से खर्च बढेगा ।पडौसी से सावधान रहें ।आप अपनी जिम्मेदारी को बेहतर संभालेंगें ।शत्रु के क़ानूनी दाव -पेंच से बचें रहें ।अधिकारी की घनिष्ठता छोड़ना उत्तम रहेगा ।दाम्पत्य सुख मिलेगा ।चल -अचल संपत्ति का संपत्ति लाभ मिलेगा ।राजनीति में रुतबा बढेगा ।धर्म कार्य करने से लाभ मिलेगा ।क़ानूनी विवाद ले देकर ही सुलझेगा ।विवाद ,वाहन भवन का योग है ।श्री वृद्धि से दोस्त पड़ेशान रहेंगें ।।
----{1}-माणिक रत्न स्वर्ण में रविवार को धारण करें ।रविवार का व्रत से स्वास्थ  उत्तम रहेगा ।अथवा रविवार को नमक न खायें ---रविवार को गायों को ढूढ खिलाएं ।--आपका नव वर्ष मंगलमय हो ?"
    -------{2}--आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पथ नित्य करें --विजयी होंगें ।
प्रेषकः -पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री "{मेरठ -भारत }

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"भ्रमणशील और मनोहारी "कर्क राशि -{विशेष =2013}


  "भ्रमणशील और मनोहारी "कर्क राशि -{विशेष =2013}
-----वर्ष 2013 में --राजनीतिक क्षेत्र में नये संपर्कों से आशातीत लाभ मिलेगा ।चल -अचल संपत्ति में इजाफा होगा ।मंगल उत्सव एवं मिलन का संयोग बनेगा ।किसी भी नये कार्य की शुरुआत करने से लाभ एवं भाग्योदय होगा ।इस वर्ष मेहनत करने वालों का सितारा बुलंद होगा ।साथी पदोन्नति में बाधक बनने  की कोशिश करेगा ।इस वर्ष ग्रहचाल विकास में सहायक सिद्धि होगी ।पूर्व की अपेक्षा आय विशेष होगी ।सोची समझी योजना कारगर सिद्ध होगी ।शत्रु षड्यंत्र से सावधान रहें ।प्रतियोगिता परिणाम उत्तम रहेगा ।यात्रा छोटी किन्तु लाभदायक रहेगी ।बढ़ते दायित्व को निभाने में सक्षम होंगें ।साल के उत्तरार्ध में आनंद की अनुभूति होगी ।साल के अंत में -मित्र ,परिजन एवं सम्बन्धियों से लाभ मिलेगा ।शादी ,पार्टी तथा देवदर्शन का योग बनेगा ।भूमि ,वाहन की लेन -देन होगी ।जमा पूंजी बढ़ेगी ।अनपेक्षित आवागमन से क्षोभ होगा ।स्वास्थ  कुछ गड़बड़ी करेगा ।समय का सही उपयोग करने से हित में रहेंगें ।अनावश्यक क्षोभ एवं परिचर्चा से बचें ।अनजान से दोस्ती का हाथ न मिलाएं ।पुराना विवाद सुलझेगा ।गया हुआ धन मिलने की उम्मीद है ।साझे कारोबार से विस्तार होगा ।घर में नये मेहमान का आगमन होगा ।पुरानी निराशा का समापन होगा ।परिवार में ख़ुशी मिलेगी ।इच्छित सहयोग मिलने से मन में ख़ुशी  रहेगी ।राज -समाज में मान सम्मान मिलेगा ।आलस्य और प्रमाद अवनति कारक है ।आधा -अधुरा काम पूरा हो जायेगा ।क़ानूनी विवाद को सुलझाना लाभदायक रहेगा ।कटुता में सरसता मिलेगी अतः मन को स्थिर रखें ------नव वर्ष मंगलमय हो ?
   {1}-मोती धारण करने से शांति मिलेगी ।चांदी के पात्र में पूजा करें या चांदी के पात्र से शिव की उपासना करें ।सफेद वस्त्र और स्वेत चन्दन लाभदायक अर्थात मन को शांति प्रदान करंगें ।
-----प्रेषकः -पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री "{मेरठ -भारत }

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अदभुत प्रेम और सच्ची निष्ठां की प्रतीक ={मिथुन राशि +2013-विशेष }

अदभुत प्रेम और सच्ची निष्ठां की प्रतीक ={मिथुन राशि +2013-विशेष }
------वर्ष -2013 का विशेष समय अच्छा बीतेगा ।लाभ और खर्च का संतुलन बना रहेगा ।दोस्तों से इच्छित सहयोग मिलेगा ।तरक्की का अवसर आयेगा हाथ में ।आपकी पूर्व की मेहनत रंग लायेगी ।घर में कटुता न लायें प्रेम का अद्भुत परिचय दें ।प्रतियोगिता परिणाम हित में रहेगा ।रोजमर्रा के कोम में कोताही न बरतें ।अधिकारीयों से लाभ मिलेगा किन्तु सावधान भी रहें हानि भी हो सकती है ।क़ानूनी विवाद सुलझाने में हित होगा ।कुटुंब परिवार वालों से विवाद हो सकता है सचेत रहें ।कारोबार में सरकार से अपेक्षित मदद मिलेगी ।न चाहते हुए यात्रा करनी पड़ेगी ।पूर्व की अपेक्षा इस वर्ष आय विशेष होगी ।आलस्य का परित्याग करें कर्म के प्रति सजग रहें ।समय की नजाकत को देखते हुए कार्य करें ।जोड़ -तोड़ से सफलता का सुयोग बनेगा ।स्वास्थ के प्रति विशेष सजग रहें ।नयेपन की अनुभूति साल भर होगी ।घर -गृहस्थ यात्रा वाहन संपत्ति का लाभ समयानुसार होगा ।अधूरा पड़ाकाम  पूरा होगा ।परिश्रम  के कारण भाग्यवान बनेंगें ।संतान से सुख एवं लाभ की उम्मीद होगी ।राजनितिक एवं परिवार -समाज में मान  सम्मान मिलेगा ।अचानक धन का लाभ होगा ।दाम्पत्य सुख मिलेगा ।गृहस्थी का उत्तरदायित्व बढेगा और चित भी बढ़ेगी ।देश -विदेशों से शुभ समाचार मिलेगा ।सुखोपभोग की वस्तु खरीदी जायेगी ।

   ------पन्ना नग स्वर्ण में कनिष्ठा अंगुली धारण करना चाहिए ।बुधवार को उधार लेन -देन न करें ।पक्षियों को दाना खिलाना +पानी पिलाना उचित रहेगा ।हरा रंग बुधवार को धारण करें ।।

    नव वर्ष मंगलमय हो !

प्रेषकः -पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री {मेरठ -भारत }

          सहायता हेतु -सूत्र -09897701636+09358885616----!! 

"नव सृजन और कला में निपुण "वृष राशि "={2013-विशेष }

"नव सृजन और कला में निपुण "वृष राशि "={2013-विशेष }
वर्ष की शुरुआत उत्तरदायित्व में वृद्धि से होगी ।विशेष समय नव सृजन और कला की खोज में बीतेगा ।लोकोपवाद की आशंका बनी रहेगी वर्ष पर्यन्त ।उद्योग और काम के क्षेत्रों में लाभ मिलेगा ।पुराने परिचित्त व्यक्ति से लाभ मिलेगा ।कटुता और विवाद से बचे रहें ।धर्मकार्य का विचार पूरा होगा तथा लाभ भी मिलेगा ।राज समाज में मान -सम्मान बढेगा ।आपके अथक प्रयास से पद मिलेगा ।नौकरी पेशा वर्ग को तरक्की का अवसर मिलेगा ।लम्बी यात्रा का योग बनेगा ।भाग्य विकास का योग बनेगा ।मेहनत के कारण  सितारा बुलंद होगा ।आपके साथी आपकी राह में हानि उत्पन्न करेंगें ।देश -विदेश से सुखद अनुभूति होगी ।असफलता के बाद सफलता मिलेगी ।पूर्व की अपेक्षा आय बढ़ेगी ।उच्च अधिकारी से सावधान रहें हानी हो सकती है ।गोचर राशि का प्रभाव सालभर आपके लिए माध्यम रहेगा ।कुछ काम बनेगा तो कुछ बिगड़ेगा ।घर गृहस्थी में प्रेम बनायें अन्यथा हानि होगी ।समय का सही उपयोग करें ।रोजमर्रा के कामों में पर्याप्त उन्नति होगी ।सेहन के प्रति सजग रहें -अनायास रोग से घिर सकते हैं ।भाग्य विकास से शांति मिलेगी ।संतान की उन्नति होगी ।संपत्ति -वाहन का योग है ।राजनीति +व्यापार की नई खोज से मन प्रसन्न रहेगा ।नया समझौता से समय अनुकूल होगा ।सचेत रहने वाले फायदे में रहेंगें ।विरोधी की कुचालों से बचे रहने में लाभ होगा ।नया काम  नये  विचार दाम्पत्य सुख में नई अनुभूति देगा ।इष्ट मित्रों से अपेक्षित मदद नहीं मिलेगी अपनी प्रतिभा के बल पर चलें ---नव वर्ष मंगलमय हो !-----
   ----{1}-हीरा या जरकन ,पन्ना के साथ पहनने से उद्योग ,राजनीति में नव अवसर प्रदान करेगा ।
          {2}-शिव की उपासना या रुद्राभिषेक से विशेष लाभ की कामना समझें ।
नोट-धन के आभाव में -शुक्रवार को सफेद वस्तु  का दान या खटाई वर्जित कर दें लाभ मिलेगा ।
       निवेदक --पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री "{मेरठ -भारत }
                आजीवन लाभ हेतु केवल -11.00- शुल्क से ज्योतिष जानकारी प्राप्त कर सकते हैं -सहायता हेतु -09897701636-09358885616----।।

"उच्च अभिलाषा आत्मबल के धनि मेष राशि ={2013-विशेष }

"उच्च अभिलाषा आत्मबल के धनि मेष राशि ={2013-विशेष }
-----इस वर्ष सोची समझी योजना पूरी होगी ।देश -विदेश से सुखद समाचार मिलेगा ।असफलता के बाद सफलता मिलेगी ।नूतन कार्ज करेंगें ।झगडे -झमेले से राहत मिलेगी ।संतान से लाभ होगा ।राजनीति क्षेत्र में लाभ मिलेगा ।घर -गृहस्थी में कटुता से बचना उचित रहेगा ।कोई भी नूतन कार्ज़ अवश्य करें भाग्य आपकी प्रतीक्षा करेगा ।ग्रहों के गोचर का फल नित्य आनंद प्रदान करेगा ।अतीत की खोज में लाभ मिलेगा ।पडौसी -दोस्त आपकी श्रीवृद्धि{लक्ष्मी }से नाखुश रहेंगें ।समस्या को सुझाने में लाभ मिलेगा ।सुखोपभोग की वस्तु खरीदेंगें ।भूमि -वाहन ,घर आदि का लेन - देन फायदे में रहेगा ।शत्रुता न करें ।जमापूंजी बढ़ेगी -अर्थात मन खुश रहेगा ।उच्च अधिकारी से विशेष दोस्ती न करें ।दिन चर्या को सही रखें अन्यथा हानि होगी ।चल -अचल संपत्ति का लाभ होगा ।इस वर्ष विशेष समय -हास्य ,रस ,आमोद -प्रमोद में बीतेगा ।कहीं से पदोन्नति का समाचार मिलेगा । दोस्त आपकी मदद करेंगें।साझा कारोबार का विचार बनेगा ।स्वास्थ परविशेष ध्यान दें ।घर में नए मेहमान के आगमन से खर्च बढेगा ।कोई आपको गुमराह करने का प्रयास करेगा सावधान रहें ।साहित्य संगीत में रुझान बढेगा ।।
   ------नोट -मूंगा स्वर्ण में धारण करना उचित रहेगा ।मोती की माला या से शांति रहेगी ।--हनुमानजी या शिव की उपासना तथा सोमवार को दूध का दान से अनुकूल साल बीतेगा ।।
    --प्रेषकः -ज्योतिष सेवा सदन {मेरठ -भारत }
            प्रबंधक -पंडित कन्हैयालाल "झा शास्त्री "
   संपर्क हेतु -------09897701636+09358885616----समय -7.30 शाम से 9.00-शाम तक ।