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शनिवार, 14 सितंबर 2013

आप सभी मित्रों का स्नेह और प्रेम का हम आभारी हैं ।

आप सभी मित्रों का स्नेह और प्रेम का हम आभारी हैं ।
बड़े मित्रों को प्रणाम ,छोटे मित्रों को आशीर्वाद तथा समकक्ष मित्रों को धन्यवाद ।
    ज्योतिष सेवा सदन सन 2010 से ज्योतिष सेवा में निरंतर तत्पर रहता हैं । हमें आप सभी देश -विदेशों में रह रहे मित्रों ने जो प्रेम दिया और स्नेह के साथ नेट {फेसबुक }पर जोड़ा, जिसकी वजह से हम अपनी आजीविका भी चला लेते हैं और आप मित्रों के प्रेम के पात्र भी बने रहते हैं । विना धन के आपतक कैसे पहुंचें यही सोच के साथ शुरू की थी निःशुल्क ज्योतिष सेवा सन 2010  में । आज 2013 तक करीब लाखों लोगों से हम मिले और  सेवा देने की कोशिश की साथ ही आप मित्रों ने जो धन दिया वो हमारे परिवार के लिए बहुत है ।
        मै भले ही धन से कमजोर था  किन्तु आप मित्रों का स्नेह ने मुझको आगे बढ़ने की प्रेरणा दी और हम आगे बढ़ते चले गए । जब हम आपको सेवा देते हैं तो हम भी अपने आपको किसी चैनल से कम नहीं समझते हैं --ये सब आप मित्रों की वजह से हुआ और हो रहा है ।
     आशा है आप सभी मित्र हमारी कमी को न देखकर आपना प्रेम और स्नेह यूँ ही प्रदान करते रहेंगें ।
आपका -ज्योतिष सेवा सदन प्रबंधक पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री
   कृष्णपुरी धर्मशाला देहली गेट मेरठ -उत्तर प्रदेश -भारत पिन -250002
निःशुल्क ज्योतिष सेवा कोई  भी मित्र बनकर एकबार प्राप्त करें -हेल्प लाइन से -09897701636 +09358885616 1 --दोस्ती करने के लिए इस लिंक पर जायें =-https://www.facebook.com/kanhaiyalal.jhashastri
2 -पेज -को पसंद करने के लिए इस लिंक पर जायें =www.facebook.com/pamditjha
3 -हमारे समूह से जुड़ने के लिए इस लिंक पर जायें =-https://www.facebook.com/groups/jyotishsevasadan/

हमारे ब्लॉक में ज्योतिष एवं कर्मकाण्ड के लेखों को पढने के लिए इस लिंक पर जायें =http://jyotishsadan.blogspot.in/2013/08/blog-post_2.html?spref=fb

गुरुवार, 12 सितंबर 2013

उम्मीद करता हूँ दोस्ती करने से पहले नियमावली अवश्य पढेंगें -

निःशुल्क ज्योतिष सेवा मिल चुकी है, दुबारा ज्योतिष सेवा चाहते हैं या दोस्ती- ज्योतिष सदन से नहीं हो पा रही है तो केवल 100 रूपये एयरटेल मणि नंबर-9897701636 में रिचार्य कर तत्काल सेवा प्राप्त कर सकते हैं ।
    ध्यान दें -आपकी ज्योतिष सेवा सदन से दोस्ती तब नहीं होती है -जब आपका प्रोफाइल आपको सही साबित नहीं करता है जैसे -आपका चित्र ,आपका सम्पूर्ण विवरण एवं आपकी सोच हमसे नहीं मिलती है ।
    1 -निःशुल्क ज्योतिष सेवा एकबार मित्र बनकर ही प्राप्त कर सकते हैं = समय -8 से 9 30 तक{ केवल रात्रि }
    2 -बिना दोस्ती के केवल 100 रूपये में ही ज्योतिष जानकारी किसी को भी मिलेगी={कभी भी दिन में }
     3 -आजीवन ज्योतिष जानकारी 1100 सौ में प्राप्त करते रह सकते हैं = {कभी भी दिन में }
उम्मीद करता हूँ दोस्ती करने से पहले नियमावली अवश्य पढेंगें -
        आपका -ज्योतिष सेवा सदन प्रबंधक पण्डित के ० एल ० झा शास्त्री मेरठ -भारत
        पता -किशनपुरी धर्मशाला देहली गेट मेरठ -250002
संपर्क कार्यालय मेरठ- अगर आपकी समझ में कोई बात नहीं आई है तो कार्यालय मेरठ से हेल्प लाइन से जानकारी इस नंबर पर प्राप्त करें -09897701636 +09358885616
1 --दोस्ती करने के लिए इस लिंक पर जायें =--https://www.facebook.com/kanhaiyalal.jhashastri
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बुधवार, 11 सितंबर 2013

" संतान और संतति आपके अनुसार भी संभव है?"

" संतान और संतति आपके अनुसार भी संभव है?"
संतान और संतति की उत्सुकता सबको होती है -और होनी भी चाहिए -किन्तु हम या तो अनभिज्ञता वश ,या विवेक हीन होने के कारण दो चीजें अनुकूल प्राप्त नहीं कर पाते हैं |-हमारे वेद में सभी कला विद्यमान है ,परन्तु -आधुनीक तकनिकी के आगे या तो हम सात्विक प्रयत्न नहीं करते ,या मजबूरी में मानते हैं - आइये अपने जीवन में संतान एवं संतति से सभी युक्त हों -जानने का प्रयास करते हैं ||-भगवान "मनु "ने -उत्तम संतान एवं पुत्र या पुत्री की कामना रखने वाले लोगों के लिये कुछ प्रयोग बताये हैं जिसे हम जानते नहीं है और जानते हैं तो उस प्रकार से चलते नहीं हैं -जब हमें संतान की कामना हो तो-आप पुत्र चाहते हो तो -पत्ती और पतनी का मिलन यदि सम तिथियों में हो अर्थात -द्वितीया,चतुर्थी ,षष्ठी,अष्टमी ,दशमी ,द्वादशी ,चतुर्दशी तिथियों में तो पुत्र की प्राप्ति होगी || पुत्री की कामना रखने वाले -विषम तिथियों का प्रयोग कर सकते हैं अर्थात -प्रतिपदा ,तृतीया ,पंचमी ,सप्तमी ,नवमी ,त्रयोदशी || एकादशी में मिलन होने पर कलंकित संतान होती है || अमावस्या -में मिलन होने पर भी पुत्री की प्रप्ती होती है | पोर्णिमा तिथि -में भी मिलन होने पर पुत्री की प्राप्ति हो सकती है - ="मनुस्मृति" का -मत है की -एकादशी ,अमावस एवं पूर्णमासी -को मिलन नहीं होना चाहिए ,इन तिथियों में देवता, पितरो की ही आराधना करनी चाहिए ||--भाव -मित्र बन्धुगन-आज हमलोग पुत्र प्राप्ति के लिये कुछ भी करते हैं ,किन्तु हमारा थोडा सा सात्विक विचार [सात्विक प्रयास ] से मनोनुकूल संतान भी मिलेगी और महिला पक्षको आत्म खिन्नता का अहसास भी नहीं कराएगी ||
--कर्मकांड में षोडश संस्कार होते हैं -गर्भाधान संस्कार ,पुंसवन संस्कार और सीमंत संस्कार ये तीनों संस्कार हमें अच्छी संतान देते हैं इन संस्कारों को भूलने के कारण ही हमलोग अपनी संतानों से दुखी होते हैं ---इन संस्कारों से हम अपनी ईच्छानुसार संतान प्राप्त आज भी कर सकते हैं --इन संस्कारों में धन नहीं मन और नियम करने पड़ते हैं ।
       = ध्यान दें --निःशुल्क ज्योतिष जानकारी कोई भी विवाहित व्यक्ति एकबार रात्रि -8 से -9 -30 में फ़ोन से मित्र बनकर प्राप्त कर सकते हैं किन्तु जानकारी प्राप्त करते समय पहले चैट पर राम -राम लिखना होगा ।
{1 }- दोस्ती करने के लिए इस लिंक पर जायें =--https://www.facebook.com/kanhaiyalal.jhashastri
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---अगर आपकी समझ में कोई बात नहीं आई है तो कार्यालय मेरठ से हेल्प लाइन से जानकारी इस नंबर पर प्राप्त करें -09897701636 +09358885616 ----आपका -ज्योतिष सेवा सदन प्रबन्धक पंडित के ० एल० झा शास्त्री कृष्णपुरी धर्मशाला देहली गेट मेरठ -भारत ।

मंगलवार, 10 सितंबर 2013

"काल सर्प दोष के लक्षण और निदान !"

"काल सर्प दोष के लक्षण और निदान !"
"ज्योतिष गणित की कुंडली में जब काल सर्प दोष से युक्त जातक होता है -तो जिन भावों में राहू और केतु विराजमान होते हैं प्रायः पड़ेशानी भी उसी प्रकार की होती है ||
1 -लग्न अर्थात प्रथमभाव,धन अर्थात द्वितीय भाव -में यदि राहू और केतु हो ,एवं काल सर्प दोष भी हो तो -जातक को -मन,धन,पतनी ,एवं स्वास्थ तथा व्यवहार के क्षेत्रों में पड़ेशानी रहती है ||निदान -पितृगायत्री के जाप एवं काल सर्प दोष के समाधान के उपरांत ही इन बातों से शांति मिलती है ||
2 -पराक्रम अर्थात तृतीय भाव ,माता अर्थात चतुर्थ भाव -में यदि काल सर्पदोष हो तो -भाई बंधुओं ,माता ,सास,संपत्ति ,वाहन इत्यादि से कष्ट होता है ||-निदान -पितृ गायत्री के साथ -नंदी श्राध ,एवं काल सर्प दोष के निदान के उपरांत ही शांति मिलती है ||
3 -संतान -अर्थात पंचम भाव,भार्या अर्थत सप्तम भाव ,आयू अर्थात अष्टम भाव-में यदि कालसर्प दोष हो-तो शिक्षा में बाधा ,संतान ,उन्नति ,दाम्पत्य सुख ,स्वास्थ की पीड़ा रहती है -निदान -महामृत्यंजय जाप ,के साथ -साथ कालसर्प दोष का उपचार करना चाहिए ,तभी इन सभी बातों से राहत मिलती है ||
4 -रोग अर्थात षष्ठ भाव , भाग्य अर्थात नवम भाव ,द्वादश भाव में यदि काल सर्प दोष हो तो -शत्रुता ,रोग ,भाग्य ,एवं खर्च तथा प्रगति में सदा बाधा रहती है ||निदान -5 लाख ब्रह्म गायत्री के जाप,नंदी श्राध ,तर्पण ,मार्जन के साथ -साथ कालसर्प दोष का निदान करने से ही शांति मिलती है ||
5  कर्मक्षेत्र -अर्थात -दशम भाव ,आय अर्थात एकादश भाव में यदि काल सर्प दोष हो तो -पिता ,कर्मक्षेत्र ,आमदनी ,के क्षेत्र में दिक्कत होती है निदान -राहू के 72  हजार जाप केतु के 28  हजार जाप तुला दान के साथ -साथ कालसर्प दोष का उपाय करने के उपरांत ही इन बातों से शांति मिलती है ||
-----भाव -मित्र बन्धु -कर्मकांड वैदिक प्रक्रिया के अनकूल कराने से ही निदान होता है परन्तु -आज कल हम लोग तोल मोल का भाव करते हैं-सरल और छोटा उपाय करने के पक्ष में रहते हैं जो हमें सही फल प्रदान नहीं करते हैं,यदि हम सपरिवार मिलकर कोई यग्य करें ,तो भार भी कम और फल भी सम्पूर्ण मिलेगा ||
   ध्यान दें --निःशुल्क ज्योतिष जानकारी कोई भी विवाहित व्यक्ति एकबार रात्रि -8 से -9 -30 में फ़ोन से मित्र बनकर प्राप्त कर सकते हैं किन्तु जानकारी प्राप्त करते समय पहले चैट पर राम -राम लिखना होगा ।
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सोमवार, 9 सितंबर 2013

"कालसर्पदोष" का अनुभव और निदान "

  "कालसर्पदोष" का अनुभव और निदान "
"ज्योतिष" के दो रूप हैं -गणित एवं फलित | -गणित-अर्थात गणना,फलित अर्थात -फलादेश | आज कोई भी गणना भी कर लेता है और फलित भी कर देता है | वास्तविकता क्या है  = हमें कुंडली का निर्माण और फलादेश के लिये उपाधि प्राप्त करनी पड़ती है ,और उस उपाधि का नाम है -"ज्योतिषाचार्य " यहाँ तक पहुँचने ले लिये हमें ,=प्रथमा,मध्यमा ,उत्तर मध्यमा या उपशास्त्री ,और अंत में "आचर्य" की उपाधि मिलती है| यहाँ तक पहुँचने के लिये हमें कई ग्रंथों के अध्ययन करने पड़ते हैं-जैसे -शिघबोध ,मुहूर्त चिंतामणि ,ताजिक नीलकंठी ,व्रेहतपराशर इत्यादि |
तब हम इस योग्य होते हैं ,कि आपका भविष्य बता सकें | "जन्मकुंडली" में  जब सभी  राहू एवं केतु के मध्य सभी ग्रह विराजमान होते हैं ,तो "कलसर्पदोष" कहते हैं यह दोष कई कारणों से बनते हैं | कभी-कभी "पितृदोष के कारण भी बन जाता है ,परन्तु यह योग तो होता है ,किन्तु समाधान भी कई प्रकार से करने पड़ते हैं | इस योग का सबसे बड़ा जो प्रतिफल है वो है ,मन और काम के क्षेत्रों में जातक को भयभीत करना | इस योग से दिक्कत भी होती है ,किन्तु यदि सही समाधान हो तो जरुरी नहीं कि दिक्कत दूर नहीं हो सकती है | यह विशेष दिक्कत तब देते हैं जब -राहू या केतु की महादशा या अनार्दशा चल रही हो | प्रायः -कुंडली में एक राशि  में यह ग्रह डेड़  साल तक निवास करते हैं | आगे हम इनके उपाय का निदान बतायेंगें |
 ज्योतिष सेवा सदन -{मेरठ- भारत }प्रबंधक पंडित के० एल० झा शास्त्री हेल्प लाइन मेरठ -09897701636 +09358885616 -----किशनपुरी धर्मशाला देहली गेट मेरठ --
{कोई भी विवाहित व्यक्ति अपनी कुण्डली की जानकारी एकबार निःशुल्क रात्रि -8 से 9 ,30 में फ़ोन से प्राप्त मित्र बनकर कर सकते हैं }-{1 }---दोस्ती के लिए इस लिंक पर जायें - -!https://www.facebook.com/kanhaiyalal.jhashastri
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{4 }-ब्लॉगर पर दोस्ती के लिए साथ ही ज्योतिष सम्बंधित लेखों को पढने के लिए इस लिंक पर जायें - http://jyotishsadan.blogspot.in/2013/08/blog-post_2.html?spref=fb--------

रविवार, 8 सितंबर 2013

"काल सर्प दोष को समझें !चिंतित न हों ?"

"काल सर्प दोष को समझें !चिंतित न हों ?"

विधाता की रचित प्रकृति में अदभुत पहेली है ,जिसको समझना इतना आसन नहीं है ,फिर भी संसार में जितने भी जीव हैं उसमे मानव को इतनी समझ तो है ही कि,अपनी राह को सरल तो बना ही सकता है |-आइये जानने की कोशिश करते हैं -कि "कालसर्प" दोष आखिर है क्या और हमारे जीवन में कौन सी उलझनें उत्पन्न करता है ?- जन्म "कुंडली" में द्वादश भाव होते हैं ,और नवग्रह होते हैं -सभी ग्रह [राहू और केतु को छोड़कर ] सामने से भ्रमण करते हैं किन्तु राहू केतु वाम भाग [पीछे ] से भ्रमण करते हैं ,-सभी ग्रहों का चलने की गति होती है-सूर्य -एक मास-रहते हैं 1 -राशि में ,चंद्रमा -ढाई दिन रहता हैं 1--राशि में ,मंगल 2  मास के करीब रहता हैं - 1 -राशि में ,बुध और शुक्र भी डेढ़  मास  के करीब रहते हैं -1 राशि में ,गुरु -1 -वर्ष रहते हैं 1 - राशि में ,राहू और केतु -डेढ़  साल करीब रहते हैं 1 राशि में ,शनि -ढाई साल रहता  हैं -एक राशि में ?-इसका मतलब हुआ कि जब राहू और केतु वाम भाग से चलते हैं और डेढ़  साल रहते हैं एक राशि में तो डेढ  साल तक कुछ राशि वालों के लिये पीड़ा कारक रहेंगें | तो निश्चित है अमुक राशि के जितने भी लोग होंगें तो - क्या सभी काल सर्प योगी और दुखी होंगें -शास्त्रकारों का अनंत मत और अनन्त ग्रन्थ हैं -किन्तु हमारा मानना है -ये दोष से युक्त तो जरुर होंगें जातक ,परन्तु -इन दोषों के  निदान और नाम अलग -अलग होगें ||
[1 ]-जब कालसर्प दोष से युक्त जातक होता है -तो सर्व प्रथम सभी कार्यों में दिक्कत आती है ,मन अनुकूल नहीं होता है ,ये राहू -केतु ,जिन भावों में होंगें तकलीफ भी उसीप्रकार की प्रदान करेंगें ||
[2 ] -यदि पूर्वजों की अकाल म्रित्यु हुई हो तो ये दोष वंशावली हो जाता है-अर्थात उस परिवार के जितने भी सदस्य होंगें सभी इस दोष से युक्त होते जायेंगें ||
[3 ]-कभी -कभी इस दोष से युक्त जातक का स्थान निरंतर परिवर्तनशील होता रहता है ||
---भाव -इस दोष का निदान अनिवार्य होता है परन्तु चिंतनीय नहीं होता है -जब हम विमार होते हैं-तो औषधियों का सेवन करके सही हो जाते हैं -ठीक इसी प्रकार से ये कष्ट का लक्षण होता है ,जिसको उपचार और उपाय से सही किया जा सकता है ||[भाग २ काल प्रसारिक करेंगें ]
ज्योतिष सेवा सदन {मेरठ -भारत }
निःशुल्क "ज्योतिष "सेवा रात्रि 8 से 9.30 प्राप्त करें--{एकबार मित्र बनकर फेसबुक पर }09897701636+09358885616--!https://www.facebook.com/kanhaiyalal.jhashastri

शनिवार, 7 सितंबर 2013

"ज्योतिष सेवा सभी मित्रों को एकबार अवश्य मिलेगी ?"

"ज्योतिष सेवा सभी मित्रों को एकबार अवश्य मिलेगी ?"
1 --प्रत्येक रात्रि समय -8 से 9 . 30 तक निःशुल्क ज्योतिष सेवा सभी मित्रों के लिए उपलब्ध रहती है । 
 2 -ज्योतिष सेवा फ़ोन से ही मिलती है किन्तु चैट पर राम -राम लिखना अनिवार्य है । 
3 --ज्योतिष सेवा एकबार ही निःशुल्क और सही मित्र बनकर ही प्राप्त कर सकते हैं । 
4 --निःशुल्क ज्योतिष जानकारी प्राप्त कर चुके हैं किन्तु पुनः ज्योतिष जानकारी चाहते हैं तो केवल -200 दो सौ रूपये देकर कभी भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं ।
5- मित्र नहीं बनना चाहते हैं किन्तु ज्योतिष जानकारी चाहते हैं तो -200 दो सौ रुपये देकर प्राप्त कर सकते हैं ।
--6 --ज्योतिष सेवा सदन से आजीवन ज्योतिष जानकारी चाहते हैं -तो केवल -1100 एग्यारह सौ रूपये देकर समयानुसार जानकारी प्राप्त करते रह सकते हैं ।
--7 --निःशुल्क ज्योतिष जानकारी प्राप्त कर चुके मित्रों से हमें मित्रता समाप्त करनी पड़ती है --लेकिन हम ज्योतिष सेवा सदन के पेज ,समूह और ब्लॉग पोस्ट से जोरे रखते हैं ताकि आप सदस्य बने या न बनें ज्योतिष एवं कर्मकांड के लेखों से रूबरू होते हैं ।
खाता संख्या -20005973259 स्टेट बैंक  मेरठ -आई, एफ, सी- कोड-एस बी आई एन 0002321----
  हमारा पत्ता -ज्योतिष सेवा सदन
प्रबंधक -पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री
किशनपुरी धर्मशाला देहली गेट मेरठ उत्तर प्रदेश पिन -250002  भारत
 संपर्क सूत्र कार्यालय -09897701636 +09358885616  

गुरुवार, 5 सितंबर 2013

देश -विदेशों में घटित होने वाली घटनाएँ {सितम्बर -2013}?"

देश -विदेशों में घटित होने वाली घटनाएँ {सितम्बर -2013}?"
--सितम्बर माह तारीख -08 /से 19 /2013 ----तुला राशि में स्थित शुक्र दुःख एवं सुख की प्रतिक्रिया को जन्म देगा ------"यदा दैत्यगुरुश्चैव तुला राशि प्रवर्तते | मेदिन्यां क्षेम मारोग्यम किंचित -किंचित रोधकृत | | 
----भाव ---अन्तर्राष्ट्रीय जगत में वैर -विरोध के साथ -साथ भय व्याप्त होगा । कहीं शांति की कोशिश होने से राहत मिलेगी लोगों को । जनता सुख -शांति का अनुभव करेगी । देश में विदेशी अतिथियों का आना खलेगा । कहीं विजय मिलने से ख़ुशी मिलेगी । राजनीति में उलटफेर हो सकता है । किसी प्रदेश की सरकार दिक्कत का सामना करेगी । बड़े अधिकारी का तबादला से चर्चा में रहेगी सरकार । बड़े घोटाले का खुलासा जानलेवा हो
सकता है । 
----तेजी मंदी विचार ---पदार्थों की कमी से मंहगाई बढ़ेगी । पक्ष के आरम्भ का भाव पलट जायेंगें अंत में ।चालू बाजार का रुख देखकर ही विशेष व्यापार करें । शेयर ,सट्टा ,सर्राफाबाजारमें नरमी रहेगी । 
----आकाश लक्षण-----पक्ष में वर्षा हो सकती है । समुद्री तूफान से भय संभव है ।---08 सितम्बर को होने वाला बुधोदय अन्तरिक्ष में उत्पात मचायेगा । अर्थात कहीं बादल फाड़ वर्षा होगी । यान -खान दुर्घटना घाट सकती है ।  सर्वे भवन्तु सुखिनः "श्री हरि "
भवदीय -ज्योतिष सेवा सदन {मेरठ भारत }निःशुल्क ज्योतिष जानकारी रात्रि 8 से 9 . 30 में एकबार अवश्य मित्र बनकर प्राप्त करें ---सूत्र -09897701636 +09358885616 ------आजीवन सदस्यता शुल्क -1100 देकर आजीवन ज्योतिष जानकारी प्राप्त कर सकते हैं ।

शनिवार, 31 अगस्त 2013

"शेयर बाजार" ज्योतिष विशेष?" {सितम्बर- 2013}

"शेयर बाजार" ज्योतिष विशेष?" {सितम्बर- 2013}
---मास की शुरुआत में ही |"राहु +केतु " का प्रभाव से विदेशी बाजार हावी हो जायेगा ,तेल से जुडी सभी कम्पनीयों के शेयर्स बढ़ जायेंगें | दुसरे सप्ताह में तुला के शुक्र के कारण ही बाजार तेज खुलेगा | तारीख -06 /से लेकर 15 /तक आई.टी। ,मेडिकल एवं एजुकेशन से जुडी सभी कम्पनियों के शेयर्स तथा म्युचुअल फंड ,बैंक कम्पनियां ,इंजीनियरिंग ,टेक्सटाइल,सीमेंट के साथ -साथ खाद्यान्न सामग्री बनाने वाली कम्पनियां तेज होंगीं अतः ये निवेश के योग्य हैं |कन्या राशि के सूर्य की संक्रान्ति 16 /दिन सोमवार होने से बाजार में स्थिरता रहेगी| जिससे तेजी -मंदी का मिला जुला असर होगा | तेजी के कारण अचानक मंदी का झटका मध्य के बाद लगेगा अतः जो सौदा पड़ा है उसे पड़ा ही रहने दें बाद में निकालें लाभ मिलेगा | महीने के तीसरे सप्ताह में 25 /को प्लूटो के मार्गी होने से इलेक्ट्रानिक आइटमों में मंदी आयेगी ,मशीनरी ,टेक्सटाइल,स्टेशनरी ,काफी ,चाय में तेजी आयेगी | मास के अंत में निवेशक -बैंकिंग ,टेलिकॉम,एवं छोटे भाव के सभी शेयर्स -जैसे किंगफिशर,विजया बैंक ,हिंडाल्को ,रैनबैक्सी,डा,लैब }में निवेश लाभप्रद होगा |
   -----नोट --सितम्बर 2013 में विशेष बात यह होगी शेयर बाजार में तेजी की चाल सहम सी जायेगी जिस कारण ठहरी मार्केट में निवेशक अधिक रूचि नहीं लेंगें अतः मार्केट में मंदी छा जायेगी |
     -----अनुकूल शेयर -सितम्बर 2013 में -किंगफिशर,हिंडाल्को ,डा,लैब ,हब टाउन। आर आल ग्रुप। विप्रो ,डेल सैमसंग ---होंगें  |
  प्रेषकः -ज्योतिष सेवा सदन {मेरठ -भारत }
हेल्पलाइन -09897701636 +09358885616  
हेल्पलाइन -09897701636 +09358885616  

शुक्रवार, 23 अगस्त 2013

"श्रीकृष्णजन्माष्टमी उत्सव मतभेद रहित होगा ?"

"श्रीकृष्णजन्माष्टमी उत्सव मतभेद रहित होगा ?"
---28 /08 /2013 -बुधवार को सर्व सम्मति से श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत और उत्सव मनाया जायेगा |अबके साल सर्वसम्मति अर्थात एकमत होगा | बारह वर्षों के बाद इस व्रतोत्सव को स्मार्त -वैष्णव अर्थात समस्त श्रद्धालुजन एक साथ मिलजुलकर इस पावन पर्व को मनायेंगें |अर्धरात्रि के समय -रोहिणी नक्षत्र ,अष्टमी तिथि ,बुधवार का संयोग होने से जीव के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और शुभ फल की प्राप्ति भी होती है
     -----'रोहिण्या मर्धरात्रे च यदा कृष्णाष्टमी भवेत,तस्यामभ्यर्चनं शीरेह्न्ति पापं त्रिजन्म्नम "
इन समस्त योगों के होने पर जो भी भाव युक्त व्रतोत्सव मनाता है उसके तीन जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं |
    भाव --एक साथ मिलजुलकर पुण्यार्जन करने का सौभाग्य कई वर्ष बाद मिला है आगे संवत 2097 में मिलेगा |
"जय श्रीकृष्ण" समस्त मित्रों को भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनायें |
    आपका -ज्योतिष सेवा सदन {मेरठ -भारत }  

बुधवार, 21 अगस्त 2013

"देश -विदेशों में इस पक्ष होने वाली घटनाएँ ?"{ज्योतिष -विशेष }

"देश -विदेशों में इस पक्ष होने वाली घटनाएँ ?"{ज्योतिष -विशेष}
---22 /08 /2013 से 5 /09 /2013 -देश विदेशों में होने वाली तमाम विशेष घटनाओं पर ज्योतिष का आकलन |
   ---भाद्र कृष्ण पक्ष संवत 2070 --इस महीने में पांच बुधवार होने से उत्तम रहेगा तो पांच गुरुवार के होने से उत्तम नहीं होगा ---जैसे --"यत्र मासे पंचवाराः जायन्ते च ब्रेहस्पतेह ,विग्रहः पश्चिमे देशे खड्गयुद्ध्नचजायते "---भाव गुरूवार पांच होने से पश्चिमी देश -तथा भारतीय कुछ प्रदेशों में भारी राजविग्रह होगा | देश जैसे -पाकिस्तान ,अफगानिस्तान ,नेपाल ,ईराक ,साऊदीअरब,टर्की ,तथा यूरोपीय देश तनावग्रस्त हो सकते हैं | अमेरिकादि देश सैन्यबल बढ़ाने की कोशिश करेंगें | एशिया में अड्डा बनायेंगें | पडौसी राज्यों से सतर्क रहना होगा | कश्मीर समस्या कुछ और भी जटिल होगी | नीच का मंगल राजनीति में संघर्ष करायेगा | चुनावी घोषणा हो सकती है |
------तेजी मंदी विचार ---तिथियों की घटा बढ़ी से भाव यथावत रहेगा  किन्तु चतुर्थी का शनिवार होने से उत्तम योग नहीं है अतः आम उपभोग की वस्तुएं दुर्लभ हो सकती हैं | देश एक दूसरे की सहायता नहीं करेंगें जिससे उत्तरोतर मंहगाई बढ़ेगी एवं लोग पीड़ित होंगें 1 सोने का दाम बढेगा अर्थात सोने में तेजी आयेगी |
-----आकाश लक्षण ----अगस्त के बाद वर्षा समाप्त हो जाती है किन्तु इस पक्ष में सभी जगहों पर वर्षा होगी | पूर्व एवं दक्षिण संभागों में अतिवृष्टि ,बाढ़ का तांडव नृत्य से जन धन की हानि होगी 1 सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में दुर्दिन होने से यातायात में बाधा पड़ेगी -अर्थात इस पक्ष कोई कुघटना चक्र संभव है { आगे श्री हरि कृपा} |
निवेदक ज्योतिष सेवा सदन {मेरठ -भारत }
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सोमवार, 19 अगस्त 2013

"कुण्डली में "मंगलीयोग"कैसे बनता है-{ज्योतिष -विशेष }

"कुण्डली में "मंगलीयोग"कैसे बनता है-{ज्योतिष -विशेष }
--"लग्ने व्यये च पाताले जामित्रे चाष्टमे कुजः ,कन्या भर्तु विनाशाय भर्तु कन्या विनाशकः ||
भाव -यदि जन्मकुण्डली के -1,4 ,7 ,8 ,12 इन स्थानों में से किसी एक स्थान में मंगल हो तो मंगली योग माना जाता है | यदि लड़की की कुंडली में मंगली योग हो तो उसके पति के लिए तथा लड़के की कुंडली में मंगली दोष हो तो पत्नी के लिए कष्टकारी होता है |
   अस्तु --जन्मकुण्डली का सातवाँ भाव अर्थात जामित्र स्थान दाम्पत्य जीवन में मिलने वाले दुःख -सुख से सम्बन्ध रखता है  |दाम्पत्य जीवन कैसा रहेगा यह निर्णय सप्तम भाव से करते हैं साथ ही उक्त भाव स्थित ग्रहों से तथा ग्रहों की दृष्टि से अनुभव किया जाता है | मंगल ग्रह अग्नितत्व कारक स्वभाव से उग्र होता है | अगर कुण्डली के 1 ,4 ,12 वें भावों में बैठा हो तो तब सातवें भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता है सातवें +आठवें  भाव में होने उन्हें विशेष पीड़ित करता है | मंगल का तीक्ष्ण प्रभाव ही दुःख का कारण बनता है | फलित के प्रणेता कार  आठवें भाव को भी दाम्पत्य जीवन से सम्बन्धित मानते हैं -----
     जैसे----"यत्कुजस्य फलं प्रोक्तं लग्ने तुर्येव्ययेअष्टमे,सप्तमे सैंहिके यार्क सौरिणाम च तथा स्मृतं ||
भाव -1 ,4 ,7 ,8 ,12 वें भावों में मंगल के अतिरिक्त और भी पापक्रूर ग्रह बैठे हों तो भी मंगली दोष  के समान हानि देते हैं जैसे -सूर्य ,शनि ,राहु ,केतु इत्यादि 1
   ध्यान दें --सप्तम भाव का कारक शुक्र है और मन का कारक चंद्रमा है | अतः शुक्र +चंद्रमा से भी योग कारक ग्रहयोगों का विचार अवश्य करना चाहिए 1
    निवेदक -ज्योतिष सेवा सदन {मेरठ -भारत }
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"कुण्डली मिलान" अति कठिन किन्तु सत्य है?"

"कुण्डली मिलान" अति कठिन किन्तु सत्य है?"
---जब आप- कुंडली मिलान के लिए -ज्योतिषी ,आचार्य ,विद्वान भूदेव ,गुरुजन या आस्था के प्रतीक व्यक्ति के पास जाते हैं तब आपकी हार्दिक इच्छा यह होती है कि इस पवित्र सम्बन्ध की सही जानकारी मिले -----
    अस्तु --आचार्य -ज्योतिषी आपकी भावना के अनुरूप कार्य भी करते हैं किन्तु यह कार्य अति कठिन होता है हमलोग केवल गुण मिलना ही मिलान समझते हैं जबकि ---जन्म कुण्डलियों में मंगलीयोग ,दीर्घायु -अल्पायु योग ,संतानयोग,पति -पत्नी में परस्पर आसक्ति -अनासक्तियोग ,विषकन्या-विषवधुयोग,कुलता या आचरण हीन योग ----"पंचपाणीग्रहे दोषाः वर्जनीयाः प्रयत्नतः " अर्थात -"दारिद्र्यं मरणं व्याधिः पोन्श्चल्य मन पत्यता "---भाव कुंडली में -दारिद्रय योग,दुर्मरण -अकालमृत्यु योग ,शारीरिक रोग ,नपुंसकता ,रज -वीर्य बलाबल ,मन की निर्बलता -सबलता के योग तो अवश्य ही विचारणीय चाहिए 1
  ----ऊपर बताये गए सभी योग विवाहित जीवन में अपना विशेष महत्त्व रखते हैं ---साथ ही सुख समृद्धि में सहायक भी होते हैं 1
नोट ----किन्तु इतना सही कार्य केवल केवल मर्मग्य विद्वान -आचार्य ही कर सकते हैं अतः कुंडली मिलान करते +कराते -समय सही निर्णय लें अन्यथा ज्योतिष और ज्योतिषियों की छवि धूमिल होगी 1
  प्रेषकः ज्योतिष सेवा सदन {मेरठ -भारत }
परामर्श कार्यालय सूत्र -09358885616+09897701636 

शुक्रवार, 16 अगस्त 2013

"रक्षाबन्धन {राखी }पर्व कब मनायें ?"

"रक्षाबन्धन {राखी }पर्व कब मनायें ?"
श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन दोपहर के समय राखी बांधने का शास्त्रों में बिधान है | किन्तु भारत के अधिकांश भूभागों में सुवह के समय ही राखी बाँध ली जाती है |
  ----अस्तु ---इस वर्ष 20 अगस्त 2013 मंगलवार में भद्रा की व्याप्ति पूर्णिमा विहितकाल में रात्रि के प्रथम प्रहार तक रहेगी | भद्रा में रक्षाबंधन और होलीका दहन दोनों को वर्जित कहे गये हैं----
      -----भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा ,श्रावणी नृपति हन्ति ग्रामं दहति फाल्गुनी ||
भाव -अगर भद्रा में रक्षाबंधन अर्थात राखी पर्व मानाते हैं तो कष्ट मिलता है और होली अगर भद्रा में जलाते हैं तो नगर में अग्नि का प्रकोप झेलना पड़ता है |
    अतः --21 -अगस्त में उदया पूर्णिमा सूर्यांतर -3 घटि 12 पल अर्थात करीब दोपहर 1. 30- तक व्याप्त रहेगा -जो कि भद्रा से सर्वथा मुक्त है इसलिए इसी समय राखी बाँधना उचित रहेगा |
  ---वर्षकृत्य-प्रदीपकार ने तो मुहूर्त मात्र उदया पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन के लिए उचित माना  है1 रक्षाबन्धन ,होलिकादहन दोनों पर्व तिथि परक सुनिश्चित है चाहे उस दिन ग्रहण हो या संक्रांति या भद्रा ही क्यों न हो इन्हें इधर -उधर हटाया नहीं जा सकता है --किन्तु हित का समय अवश्य निकाला जा सकता है |
  निर्णयसिन्धुकार-- का कथन यह है--"इदं रक्षा बन्धनं नियतकालत्वाद्भद्रावर्ज्य ग्रहणादिनेपिकार्य होलिकावतग्रहसंक्रन्त्यादोरक्षानिषेधाभावात -------अर्थात अपने विदित समय पर ही ये दोनों पर्व मनाने चाहिए
अर्थात रक्षाबंधन 21 अगस्त 2013 बुधवार में ही सर्वमान्य होगा |  
   प्रेषकः ---ज्योतिष सेवा सदन {मेरठ -भारत}

रविवार, 11 अगस्त 2013

"वास्तु और दिशा-ब्रह्मस्थल {ज्योतिष -विशेष }?"

"वास्तु और दिशा-ब्रह्मस्थल {ज्योतिष -विशेष }?"
----वास्तु अर्थात -निवास स्थान ----दश दिशायें होती हैं उन सभी दिशाओं का अपना -अपना प्रभाव होता है | एक आम व्यक्तियों के लिए वास्तु के अनुकूल भले ही भवन न निर्माण हो सके किन्तु एक कोशिश अवश्य हो सकती है जिस प्रकार से ज्योतिष शास्त्र में भाग्य का परिवर्तन भले ही न हो सके किन्तु कर्मकांड के द्वारा रक्षा अवश्य हो सकती है |
अस्तु -----ब्रह्मस्थल --अर्थात --भवन का "आंगन "---के देवता स्वयं ब्रह्माजी हैं तथा तत्व आकाश है | इस स्थान पर अर्थात "ब्रह्मस्थल " पर आँगन अवश्य होना चाहिए साथ ही ऊपर से खुला जाल होना भी चाहिए जिससे आँगन में धुप -हवा का आना उत्तम रहता है | भवन का साफ सुथरा निर्माण एवं भार रहित होना निवासियों को विशाल हृदय के साथ -साथ विशाल बुद्धि मिलती है |
    -----निवास और कार्यालय का अकार वर्गाकार एवं -21 %1 अनुपात तक आयताकार शुभ होता है | प्रवेशद्वार शुभ जगह होना चाहिए | निर्माण एवं गृहप्रवेश शुभ मुहूर्त  में होना अति आवश्यकहोता है |भवन की उत्तर दिशा एवं पूर्व दिशा में सड़कऔर खुला होने से शुभ रहता है| छत पर कबाड़ नहीं होना चाहिए | बंद घड़ियाँ ,बेकार मशीन भी घर में नहीं रखने से वास्तु देवता प्रसन्न रहते है ,घर में रहने वाले सभी लोग प्रसन्न रहते हैं|
भाव ---जीवन में जितनी जरुरत ज्योतिष की होती है शायद अगर माने तो वास्तु भी बहुत ही जरुरत की चीज है -जिसे हम परखकर देख सकते हैं --हम अपने संस्कार और संस्कृति जीवित रखने के लिए सदियों से वास्तु का भी अनुसरण करते आये हैं जभी तो दूर से ही तुलसी ,ॐ ,स्वस्ति की अलौकिक छवि भवन के द्वार पर पहले ही दिखाई देती है यही तो वास्तु शास्त्र की वास्तविकता है |
प्रेषकः -ज्योतिष सेवा सदन {मेरठ -भारत } परामर्श हेतु सूत्र -09897701636 +09358885616

शनिवार, 10 अगस्त 2013

"जुड़े हुए और जुड़ने वाले सभी सदस्य निवेदन पर ध्यान दें ?"

"जुड़े हुए और जुड़ने वाले सभी सदस्य निवेदन पर ध्यान दें ?"
1. ---आपका अपना चित्र प्रोफाइल पर अवश्य होना चाहिए ,आपकी समस्त जानकारी प्रोफाइल में सही एवं अनुकूल होनी चाहिए क्योंकि ज्योतिष की लालसा सबको होती है और जुड़ने वाले या जुड़ें हुए मित्रों - में कोई माँ ,कोई बहिन ,कोई पिता तो कोई भाई की तरह होंगें और हम जैसे एक परिवार में रहते हैं --ठीक ज्योतिष सेवा सदन एक परिवार की भांति सभी मित्रों के साथ व्यवहार करता है -आशा है --अगर आप ज्योतिष सेवा सदन से जुड़ें हैं तो आपका आचरण एक परिवार की तरह होना चाहिए अन्यथा दोस्त न बनें या जो नियमावली का पालन नहीं कर सकते हैं वो मित्र ज्योतिष सेवा सदन से मित्रता समाप्त कर दें |
2 . ----निःशुल्क ज्योतिष सलाह रात्रि -8 से 9. 30 में केवल मित्र अपनी ही कर सकते हैं केवल एकबार इसके लिए जानकारी प्राप्त करने वाले मित्र को चैट पर केवल राम -राम लिखना होगा और जानकारी फ़ोन से उसी समय प्राप्त करनी होगी अगर आप फ़ोन से जानकारी नहीं प्राप्त करते हैं तो दुबारा जानकारी नहीं मिलेगी या दोस्ती समाप्त कर दी जायेगी ध्यान दें फ़ोन का अतिरिक्त खर्च नहीं आयेगा |
3 . -----अगर आप विदेशों में रहते हैं तो एकबार निःशुल्क जानकारी स्काइप पर रात्रि 8 से 9 -30 में प्राप्त कर सकते हैं किन्तु उससे पूर्व आपको फेसबुक पर राम -राम चैट पर लिखना होगा | अगर आप आजीवन सदस्य हैं तो स्काइप पर जानकारी कभी भी प्राप्त कर सकते हैं |
4 . ---अगर आप दोस्त नहीं बनना चाहते हैं तो शुल्क 100 रूपये देकर कभी भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं | अगर आपको एकबार निःशुल्क सलाह मिल चुकी है दुबारा चाहते हैं तो केवल -100 रूपये देकर पुनः जानकारी प्राप्त कर सकते हैं |
नोट ज्योतिष सम्बंधित किसी भी प्रकार की जानकारी  केवल फ़ोन से ही प्राप्त कर सकते हैं ----चैट पर कोई भी जानकारी नहीं मिलेगी --आशा है सर्वे भान्तु सुखिनः ----का पालन सभी मित्र करेंगें |
निवेदक -ज्योतिष सेवा सदन {मेरठ -भारत }प्रबंधक पंडित कन्हैयालाल झा शास्त्री --सहायता हेतु सूत्र -09897701636 +09358885616

"वायुकोण और उत्तरदिशा= विचार वास्तु का कैसे करें ?"

"वायुकोण और उत्तरदिशा= विचार वास्तु का कैसे करें ?"
--यूँ तो वास्तु शास्त्र एक अथाह सागर की तरह है फिर भी कुछ न कुछ तो मनोनुकूल निर्माण के समय कर ही सकते हैं |
---वायुकोण ---पश्चिम और उत्तर के मध्य भाग को वायुकोण कहते हैं ---निर्मित भवन की इस दिशा -के देवता "वायुदेव" हैं तथा स्वामी -ग्रह चंद्रमा हैं | यहाँ का तत्व "वायु " है | यह दिशा -मित्र ,राज्य ,रिश्तेदारों के लिए सुख कारक होती है अर्थात भवन में यदि यह दिशा दोष रहित होगी तो ये तमाम सुख मिलेंगें रहने वालों को अन्यथा इन सुखों से रहित हो जाते हैं निवास करने वाले लोग | --इस स्थान का खुला होना उत्तम होता है ,यहाँ के फर्श पर वायु का स्पर्श होना चाहिए | इस दिशा में बगीचा लगाने से लाभ होता है |
 ------उत्तरदिशा ----के देवता -धन के स्वामी श्री कुबेरजी हैं तथा स्वामी ग्रह बुद्धिदाता "बुद्धदेव हैं| यह दिशा भवन में अच्छी होने पर -रहने वालों को धन ,ऐश्वर्य ,संपदा देती है | इस दिशा का फर्श लेवल एवं भवन की ऊँचाई दक्षिण की तुलना में नीची होनी चाहिए | इस दिशा में ढलान होना शुभ रहता है | इस दिशा में दक्षिण के मुकाबले अधिक खाली जगह के साथ -साथ हल्का निर्माण और नदी आदि का जलस्रोत होने से सम्पन्नता बनी रहती है |
-------भाव ---अगर हम भवन का निर्माण कर रहें हैं या करने वाले हैं तो क्यों न वास्तु शास्त्र के अनुकूल करें जो हमें सुखद एवं शांति जीवन प्रदान करें 1 ज्योतिष अगर भविष्य द्रष्टा है तो वास्तु अलौकिक सुख प्रदाता है |
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शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

"नैऋत्यकोण एवं पश्चिम दिशा" भी वास्तु के योग्य बनायें ?"

नैऋत्यकोण एवं पश्चिम दिशा" भी वास्तु के योग्य बनायें ?" --भवन - निर्माण के समय "नैऋत्यकोण "अर्थात दक्षिण एवं पश्चिम जे बीच का भाग -के देवता नैऋति हैं तथा स्वामी ग्रह राहु एवं केतु हैं |यहाँ का तत्व पृथ्वी है | यह दिशा नेतृत्व ,कंट्रोल ,स्थायित्व प्रदान करती है अर्थात -वास्तु का स्थान यही है | यहाँ सबसे भारी ,सबसे ऊँचा निर्माण ,सबसे ऊँचा फर्श का लेवल होना चाहिए | इस दिशा का पूरी तरह ढका एवं बंद होना स्थिरता के साथ -साथ भाग्य को भी बुलंद करता रहता है |
  नोट -इस दिशा में सही निर्माण नहीं होने से लोग अस्थिर रहते हैं एवं भाग्य भी सही साथ नहीं देता है -अतः निर्माण के समय अवश्य ध्यान दें |
--------पश्चिम दिशा ---के देवता -वरुण हैं तथा स्वामी ग्रह "शनिदेव "हैं | यह दिशा सामंजस्य ,प्रेमप्रदाता और न्याय बुद्धि के दाता होती है| यहाँ के फर्श का लेवल तथा भवन की ऊँचाई पूर्व दिशा के अनुपात ऊँचा होना सही रहता है | पूर्व दिशा की अपेक्षा भारी निर्माण होना चाहिए | साथ ही साथ पूर्व दिशा की अपेक्षा कम खुली जगह वास्तु सम्मत है |
---भाव -जब भी निर्माण भवन का करना हो तो ये शायद काम आये -पश्चिम दिशा में निर्माण करते समय इस बात पर ध्यान देने से मन शांत और सही राह चलने की क्षमता रहने वालों को सदा मिलती रहती है |
भवदीय -ज्योतिष सेवा सदन{मेरठ -भारत } परामर्श शुल्क 100 रूपये प्रतिबार ---आजीवन सदस्यता शुल्क -1100 सौ रूपये केवल एकबार -सहायता सूत्र -09358885616  

"वास्तु के अनुकूल हैं " अग्नि कोण +दक्षिण दिशा"?"


"वास्तु के अनुकूल हैं " अग्नि कोण +दक्षिण दिशा"?"
--अग्निकोण -के स्वामी "अग्निदेवता " हैं ,और स्वामी ग्रह सौन्दर्य एवं भौतिक सुखों के दाता "शुक्रदेव "हैं | यहाँ अग्नि सम्बंधित कार्य ,रसोई ,जनरेटर ,भट्ठी का होना शुभ रहता है | इस दिशा में अंडरग्राउंड जलाशय ,बोरिंग ,नलकूप होने से रहने वाले लोंगों पर बुरा असर पड़ता है --अतः जब भ भवन का निर्माण करें इसका विचार अवश्य करें |
     -------दक्षिण दिशा ----के स्वामी यम देवता हैं 1 स्वामी ग्रह और सेनापति मंगलदेव हैं | यहाँ का फर्श का लेवल एवं मकान की ऊँचाई उत्तर की अपेक्षा ऊँची ,और उत्तर की अपेक्षा कम खुला स्थान के साथ -साथ भारी निर्माण लाभप्रद होता है |
 ---अस्तु ----किसी भी भवन के निर्माण के समय अग्निकोण में अग्निके के सिवा जल का स्थान नहीं होना चाहिए और साथ ही दक्षिण दिशा खाली नहीं होनी चाहिए क्योंकि दिक्षिण की हवा जब घर में प्रवेश करती है तो रोग उत्पन्न होते हैं इसलिए दक्षिण दिशा में भारी वास्तु रखनी चाहिए |
निवेदक -ज्योतिष सेवा सदन {मेरठ -भारत }सलाह शुल्क -1100 रूपये प्रतिव्यक्ति आजीवन -सहायता सूत्र -0935885616